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कठुआ कांड में आया नया मोड़, एसआईटी ने सप्लीमेंट्री चालान में 130 और गवाह जोड़े

Tue, 31 Jul 2018 09:35 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरदासपुर/पठानकोट (पंजाब)
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AMAR UJALA
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जम्मू के कठुआ रेप और हत्याकांड में सोमवार को एसआईटी ने सप्लीमेंट्री चालान पेश कर 130 नए गवाह जोडे़। एसएसपी क्राइम ब्रांच राजेश कुमार झाला ने 614 पन्नों का सप्लीमेंट्री चालान सेशन कोर्ट में पेश किया। इस चालान में 130 नए गवाह शामिल किए गए हैं। इसके बाद केस में गवाहों कि संख्या 221 से बढ़कर 351 हो गई है। वहीं गवाहों के बयानों की पृष्ट संख्या 1335 पहुंच गई है।
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इस बारे में अभियोजन पक्ष के वकील जेके चोपड़ा ने कहा कि हमारा उद्देश्य ज्यादा सही तरीके से केस का ट्रायल करवाना है ताकि पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके। पहले से दी गई 721 पेजों के चालान के बाद इस सप्लीमेंट्री चालान में कुल 614 पेज नए जोडे़ गए हैं।

इससे पहले भारी सुरक्षा के बीच सातों आरोपियों सांझी राम, दीपक खजूरिया, सुरेंद्रकुमार, परवेश कुमार, विशाल जंगोत्रा, तिलकराज, आनंद दत्ता को सेशन कोर्ट में पेश में किया गया। वहीं सोमवार को 17वें गवाह को पेश कर जिरह की जानी थी, जो नहीं हो पाई। वहीं डिफेंस के वकील एके साहनी ने कहा कि चालान की कॉपी डिफेंस के सभी वकीलों के पास पहुंची चुकी है। चालान में क्या है, इसका पता मंगलवार को चलेगा।
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 उन्होंने कहा कि सप्लीमेंट्री चालान से केस में कंफ्यूज करने की कोशिश की गई है। क्योंकि 18 गवाहों की गवाही से अभी तक कुछ पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है। उन्होंने बताया कि डिफेंस की तरफ से दी दरख्वास्त की सुनवाई एक अगस्त को है। इसके बाद ही हमें गवाहों के बारे में कुछ पता चल सकेगा।

 
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धमकी मिलने का तो सवाल ही नहीं : साहनी

सांकेतिक तस्वीर - फोटो : DEMO PHOTO
 बचाव पक्ष का कहना है कि 353 गवाहों के 1335 पृष्टों के बयान याद रख जिरह करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। 614 पेज के सप्लीमेंट्री चालान के बाद साहनी ने कहा कि यह केस गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज होगा। उनका कहना था कि यदि कसाब और अफजल के केस में गवाहों की जानकारी पहले मिल सकती है तो इस केस में क्यों नहीं? उन्होंने उम्मीद जताई कि उन्हें एक दिन पहले गवाह की जानकारी मिले, ताकि किसी निर्दोष को सजा न भुगतनी पड़े। 

इसलिए हमें पहले से यह ज्ञात होना चाहिए कि हमने सुबह जाकर किस गवाह से जिरह करनी है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल साहनी ने बताया कि हमारे रोजाना पांच घंटे सफर में बीत जाते हैं। अदालत पांच बजे के बाद तक काम करती है। हम 6 बजे के करीब पठानकोट से निकलकर ढाई घंटे के सफर के बाद जम्मू पहुंचते हैं और सुबह फिर पठानकोट की अदालत में पेश होने के लिए निकल पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि हमने सेशन अदालत में गवाहों के बयान पढ़ने के लिए समय मांगा है, ताकि पीड़ित पक्ष के साथ नामजद आरोपियों को भी पूरा इंसाफ मिल सके।

साहनी ने कहा कि अगर किसी गवाह को धमकी मिली है तो जज को बताना चाहिए था। गवाहों में पहले से 3 मजिस्ट्रेट शामिल हैं और अधिकतर पुलिस वाले हैं। उन्हें किसी से धमकी मिलने का सवाल ही नहीं उठता। यह भी पता चला है कि कठुआ में प्रोसिक्यूशन तथा क्राइम ब्रांच ने एक कोठी ली है, जिसमें एक दिन पहले गवाह को बुलाकर पूरी तैयारी की जाती है। इसमें गवाह की सुरक्षा से संबंधित पुख्ता इंतजाम भी किए जाते हैं। इसलिए उन्हें भी पूरी ईमानदारी और निष्पक्ष तरीके से पूरी जानकारी मिले। ताकि वह अपना काम सही ढंग से कर सकें।

सितंबर तक फाइनल कर देंगे केस
वहीं प्रोसिक्यूशन के वकील संतोख सिंह बसरा ने आरोप लगाया कि गवाहों की जानकारी पहले मिलने से धमकी दी गई थी। इस संबंध में शिकायत क्राइम बांच को दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि हम इस केस में सभी गवाहों को कोर्ट में पेश नहीं करेंगे। कुछ मुख्य गवाह ही पेश होंगे। गवाह तो एक ही काफी होता है। हम इस केस को लंबा नहीं खींचेंगे, सितंबर के अंत तक हम इसे फाइनल कर देंगे। वहीं, उन्होंने कठुआ में कोठी लिए जाने के बारे में बचाव पक्ष के वकील की बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। 
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