हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद यमुना नदी का लेवल बढ़ने से हरियाणा और दिल्ली पर बाढ़ का खतरा मंडरा जाता है। इस समस्या का समाधान है, और इस पर अमल हो जाए तो न बाढ़ आए और न ही लोग व उनकी फसल तबाह हो। हिमाचल प्रदेश में रेणुका, किसाऊ और लखबार बांधों के बनने से ही हरियाणा में बाढ़ का प्रकोप रुकेगा।
सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों ने आपात बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को यह जानकारी दी है। सिंचाई विभाग के प्रधान सचिव अनुराग रस्तोगी ने सीएम को बताया कि रेणुका बांध गिरी नदी पर, किसाऊ बांध यमुना नदी पर और लखबार बांध टोंस नदी पर बनाए जाने हैं।
जब यह बांध इन नदियों पर बन जाएंगे तो हरियाणा में बाढ़ की स्थिति नहीं बनेगी और न ही बाढ़ आएगी। इन बांधों के बनने से हरियाणा को अतिरिक्त पानी भी मिलेगा। पानी की कमी वाले दिनों, गर्मियों व सर्दियों के दौरान भी राज्य को इन बांधों के माध्यम से जल प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री ने फीडबैक लेने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि हिमाचल प्रदेश में बनने वाले बांधों के विषय में हरियाणा में होने वाले प्रभाव पर गहन अध्ययन करें, ताकि हिमाचल प्रदेश में बनने वाले बांधों से राज्य में किसी भी प्रकार का कोई असर न हो। अगर बांध बनने से हरियाणा को लाभ या हानि होनी है तो उसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए।
हरियाणा के चार राज्यों में मचाई तबाही
हरियाणा में बाढ़
यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, पानीपत में तबाही मचाते हुए यमुना का जल अब दिल्ली पहुंच गया है। इस समय यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। यमुना से सटे गांवों के लोगों को नदी की ओर नहीं जाने की चेतावनी दी गई है। 22 हजार एकड़ फसल पानी में डूब गई है। रविवार सुबह 6 बजे यमुना का जल स्तर 205.44 था। यह शाम छह बजे तक 205.51 मीटर तक पहुंच गया। यह खतरे के निशान 204.83 मीटर से .68 मीटर ऊपर है।
हालांकि हथिनी कुंड बैराज पर पानी का लेवल छह लाख से कम होकर दो लाख क्यूसेक रह गया है, लेकिन यमुना का रौद्र रूप बरकरार है। छह लाख क्यूसेक पानी की रफ्तार ने आसपास के पांच किमी के इलाके में जमकर तबाही मचाई है। आधी रात के बाद पानी किनारे तोड़ते हुए गांवों में घुस गया। खेत, सड़कें और गलियां पानी से भर गई हैं। इस समय चारों जिलों के 35 गांवों में नदी का पानी घुस चुका है। अन्य 50 गांवों पर खतरा मंडरा रहा है।
हरियाणा सिंचाई विभाग के प्रधान सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि यमुना के पानी को नियंत्रित करने के लिए तीन बैराज बनाए गए हैं, जिसमें से एक बैराज हथिनीकुंड है, जो हरियाणा के पास है, जबकि एक बैराज वजीराबाद में है, जो दिल्ली के पास है। इसी प्रकार एक बैराज ओखला में है जो उत्तर प्रदेश के पास है। उन्होंने कहा कि बैराज में पानी को स्टोर नहीं किया जा सकता है। जब यमुना में पानी 2.50 लाख क्यूसेक से ऊपर जाता है तो उसे तकनीकी रूप से हाई फ्लड कहते हैं, लेकिन इससे कहीं किसी आबादी को नुकसान नहीं होता है।