हरियाणा में जहरीली शराब कांड को लेकर हो रही फजीहत के बीच सरकार ने एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन कर दिया है। यह एसआईटी पूरे हरियाणा में इस तरह के मामले खंगालेगी और पता लगाएगी कि यह नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा है। प्रदेश में इस तरह के कितने ठिकाने हैं और कौन लोग इस नेटवर्क में शामिल हैं। यह पता कर एसआईटी को 15 दिन में रिपोर्ट देनी होगी।
गृह मंत्री अनिल विज ने बताया कि एडीजीपी श्रीकांत जाधव को एसआईटी का मुखिया बनाया गया है। वर्तमान में वे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का नेतृत्व कर रहे हैं। चार अन्य आईपीएस अधिकारियों वाईएस पूरन कुमार आईजी अंबाला रेंज, राजेश दुग्गल एसपी कुरुक्षेत्र, गंगा राम पूनिया एसपी करनाल और नरेंद्र बिजानिया एसपी मेवात को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
राज्य में लगातार पैर पसार रहा शराब माफिया
उधर, इस मामले में शनिवार को भी गुमड़ गांव के तीन और लोगों की मौत हो गई थी। विधानसभा में भी विपक्ष ने इस मामले में सरकार को घेरा है। सोनीपत शराब माफियाओं का केंद्र बनता जा रहा है। इस बात को लेकर भी ग्रामीणों में असंतोष है। पहले खरखौदा से लॉकडाउन के दौरान गोदाम से शराब की तस्करी हुई। इस मामले में अभी तक सरकार जांच ही कर रही है कि एक और कांड हो गया। इसमें कई जानें चली गईं। ग्रामीणों में इसलिए रोष है कि हरियाणा में इस तरह के मामले नहीं होते थे लेकिन शराब माफिया दिन-ब-दिन पैर पसारता जा रहा है।
कुछ लोग पैसा कमाने के चक्कर में जहरीली शराब के दुष्प्रभाव का ध्यान नहीं करते : मुख्यमंत्री
जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत के सवाल पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रविवार को कहा कि कुछ लोग पैसा कमाने के चक्कर में जहरीली शराब के दुष्प्रभाव का ध्यान नहीं करते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस द्वारा इस्तीफा मांगने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 1980 से लेकर 2004 तक 12 बार जहरीली शराब से मौतें हो चुकी हैं। उस समय जिनकी सरकार थी, उन्होंने इस्तीफे नहीं दिए। 1980 में नरवाना में भी मौत हुई थी। उस समय रणदीप सुरजेवाला तो राजनीति में सक्रिय नहीं थे, लेकिन उनके पिता राजनीति में थे। उस समय सुरजेवाला ने क्यों नहीं इस्तीफा दिया।