एसआईटी प्रमुख डीआईजी रणबीर सिंह खटड़ा ने बताया कि मोगा में 2011 में हुई आगजनी की घटना की जब साल 2018 में जांच की जा रही थी तो उस दौरान इन डेरा प्रेमियों के बारे में पता चला था। मामले में गिरफ्तार सातों डेरा अनुयायियों ने अपना अपराध स्वीकार किया है। इसके चलते एसआईटी ने केस में डेरा प्रमुख और डेरे की कमेटी के तीन सदस्यों को भी नामजद किया है।
सोमवार को चालान पेश करते हुए कमेटी के तीनों सदस्यों के खिलाफ अदालत से वारंट जारी करवाने के लिए भी आवेदन दिया गया है। ये तीन आरोपी बठिंडा और मोगा जिले की बेअदबी घटनाओं में भी वांछित हैं। डीआईजी खटड़ा ने कहा कि एसआईटी की तरफ से सुनारिया जेल में बंद डेरा प्रमुख से पूछताछ करने के लिए अगली प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
एसआईटी की पड़ताल के दौरान सामने आया कि डेरा सिरसा और सिख जत्थेबंदियों के बीच चल रहे विवाद के दौरान एक धार्मिक सभा में डेरा अनुयायियों के गले में पहने हुए लॉकेट उतरवाए गए थे। इसे डेरा अनुयायियों ने अपना अपमान समझा। उसका बदला लेने के लिए ही डेरा सिरसा में पावन स्वरूप चोरी करके उसकी बेअदबी करने की साजिश रची गई थी। यह अपराध डेरा सिरसा प्रमुख और नेशनल कमेटी के सदस्यों की शह पर किया गया।
एसआईटी प्रमुख ने बताया कि पावन स्वरूप चोरी करने से लेकर उसकी बेअदबी करने तक की सभी हिदायतें डेरा सिरसा से दी गई थीं। वहां से मिलने वाली हिदायतों के तहत ही आरोपियों ने पावन स्वरूप चोरी करने के बाद उसे कई दिनों तक एक अनुयायी के घर में छिपा कर रखा और नए आदेश मिलने पर उसकी बेअदबी की गई।
फिलहाल एसआईटी ने स्वरूप चोरी करने वाले केस में धाराओं की भी बढ़ोतरी कर ली है और पावन स्वरूप चोरी करने के लिए प्रयोग कार भी बरामद कर ली है। उधर, इस केस में पुलिस रिमांड पर चल रहे डेरे के पांच अनुयायियों को सोमवार अदालत में पेश किया गया और एसआईटी के आग्रह पर इन सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वहीं, दो आरोपियों को जमानत मिली हुई है।