उन्हें तो कांग्रेस पार्टी भी छोड़ देनी चाहिए। बैंस ने कहा कितनी अजीब बात है कि कांग्रेस की सरकार में एक बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह को रेत की चोरी करने की वजह से इस्तीफा देना पड़ता है और नवजोत सिंह सिद्धू को चोरों को पकड़ने के लिए इस्तीफा देना पड़ा। लोकसभा चुनाव के बाद तो खुद राहुल गांधी कमजोर हो गए हैं। इस्तीफा दे चुके हैं।
एक माह तक कैप्टन-सिद्धू विवाद को सुलझाने में लगे रहे। क्योंकि सिद्धू की ओर से ट्विटर पर डाला गया इस्तीफा 10 जून का है। इससे साफ होता है कि राहुल खुद इस विवाद को सुलझाने में नाकाम साबित हुए हैं।
राहुल गांधी के बाद तो सिद्धू ने सीएम और स्पीकर को भी अपना इस्तीफा भेज दिया है, लेकिन यह इस्तीफा तब तक अधूरा है, जब तक वह कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा नहीं देते। पीडीए की प्रधानगी को लेकर उठे विवाद को बैंस ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोई विवाद नहीं है। सभी गठबंधन धर्म की पार्टियों के एक-एक सदस्य को शामिल करके कमेटी बनी है जो इस पूरे मामले को लेकर विचार करेगी।