हरियाणा के गवर्नर बीरेंद्र नारायण चक्रवर्ती ने 1974 में चक्रवती लेक के नाम से उद्घाटन किया था। इसे पहले चक्रवती लेक कहा जाता था। इसके बाद लेक का नाम कर्ण लेक रखा गया। करीब 80 एकड़ में कर्ण लेक बना हुआ है।
एक झील है जिसमें नहर से पानी आता है और यहां पर पर्यटक बोटिंग कर पूरा आनंद लेते हैं। कर्ण लेक पर एक रेस्टोरेंट है, जिसमें 19 एसी कमरे हैं। दो फैमिली हॉल हैं, बार हैं और हर प्रकार का स्वादिष्ट खाना भी मिलता है।
कर्ण लेक पर देर शाम तक पर्यटक बोटिंग कर सकें। इसके लिए 18 हाई मास्क एलईडी लाइटें लगाई गई हैं। इन लाइटों से रात को भी कर्ण लेक जगमगाती रहती है। झील पर मोटर बोट भी हैं। इनमें बैठकर पर्यटक झील का आनंद लेते हैं। जल्द ही झील में सोलर बोट भी चलाई जाएंगी। जो धूप में चार्ज होती रहेंगी। इससे बिजली की भी बचत होगी और बोटिंग का किराया भी कम किया जाएगा।
दोबारा शुरू होगा म्यूजिक लाइव बैंड
लेक पर दोबारा से म्यूजिक लाइव बैंड की शुरुआत की जाएगी। रेस्टोरेंट में पर्यटक म्यूजिक लाइन बैंड के विद डिनर करेंगे। हालांकि पहले भी इसकी शुरुआत की थी। अब दोबारा इसे शुरू किया जाएगा, ताकि लोगों को खाना खाते समय भी आनंद आए।
कर्ण लेक को और सुंदर बनाने के लिए दस करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। नया म्यूजिकल फाउंटेन लगाया जाएगा, लिफ्ट लगाई जाएगी बैंक्वेट हॉल बनाया जा रहा है। सड़कें दोबारा से बना दी गई हैं, म्यूजिकल लाइव बैंड शुरू किया जाएगा और साथ ही सोलर बोट भी जल्द ही लाई जाएंगी। -अनिल बजाज, टूरिस्ट ऑफिसर, कर्ण लेक करनाल।