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जेल से दुनिया को दिया शांति का संदेश, कैदियों ने यज्ञ में डाली आहुतियां और गूंजे गीता के श्लोक

Mon, 25 Nov 2019 11:24 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
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जिला कारागार में गूंजे गीता के श्लोक। - फोटो : अमर उजाला
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कुरुक्षेत्र जिला कारागार सोमवार को गीता के श्लोकों से गुंजायमान हुआ। सैकड़ों कैदियों ने गीता के पांचवें अध्याय के श्लोकों का सामूहिक पाठ करते हुए यज्ञ में आहुतियां दीं। इस यज्ञ का आयोजन मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा किया गया। मिशन के संयोजक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने बंदियों को गीता की शिक्षा अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया। 

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मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा आयोजित अठारह दिवसीय कार्यक्रम के पंचम दिवस ‘मानवीय जीवन मूल्यों के संदर्भ में श्रीमद्भगवतगीता’ विषय पर गीता संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत बंदियों से गीता को जीवन में धारण करने का संकल्प करवाया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ जिला जेल अधीक्षक डॉ. संजय सिंह, मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र, श्रुति विज्ञान आचार्यकुलम के परमाध्यक्ष आचार्य वेदव्रत एवं जेल उपाधीक्षक शिवेंद्रपाल सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित करके किया।

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कार्यक्रम जेल के हवालाती एवं बंदियों ने सामूहिक रूप से वैदिक हवन यज्ञ में श्रीमद्भगवतगीता के पांचवें अध्याय के श्लोकों की आहुति डाली और सामूहिक गीता पाठ किया। आचार्य वेदव्रत के सान्निध्य में वैदिक हवन यज्ञ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला जेल अधीक्षक डॉ. संजय सिंह ने कहा किसी भी इंसान के जीवन में मूल्यों का अहम योगदान रहता है क्योंकि इन्हीं के आधार पर अच्छा-बुरा या सही-गलत की परख की जाती है। 

मानव जीवन की पहचान उसके जीवन मूल्य हैं। उसके बाद उसका विद्यालय, जहां से उसे शिक्षा हासिल होती है। परिवार, समाज और विद्यालय के अनुरूप ही एक व्यक्ति में सामाजिक गुणों और मानव मूल्यों का विकास होता है।

प्राचीन भारत में पाठशालाओं में धार्मिक शिक्षा के साथ मूल्य आधारित शिक्षा भी जरूरी होती थी। लेकिन समय के बदलाव के साथ यह कम होता चला गया और आज वैश्वीकरण के इस युग में मूल्य आधारित शिक्षा की भागीदारी लगातार घटती जा रही है। कार्यक्रम में रघुवीर सिंह, डिप्टीलाल, मुकेश सहित समस्त जेल के प्रशासनिक अधिकारी एवं मातृभूमि सेवामिशन के सदस्य मौजूद रहे।
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विभिन्न राज्यों के लोक नृत्य पर जमकर नाचे पर्यटक

विभिन्न राज्यों के लोक कलाकारों ने लोक नृत्य प्रस्तुत कर पर्यटकों को अपने मोहपाश में बांधने का काम किया। इस अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में आने वाले पर्यटक मस्ती के साथ झूमते नजर आए। इन लोक नृत्यों में पंजाब, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर के कलाकारों ने भी अपने-अपने प्रदेश के लोक नृत्य प्रस्तुत कर क्राफ्ट और सरस मेले में खरीदारी करने वाले पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित किया।

महोत्सव के क्राफ्ट और सरस मेले में तीसरे दिन सोमवार को कुरुक्षेत्र व आसपास के शहरों से पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू हो गया है। क्राफ्ट व सरस मेले के तीसरे दिन पर्यटकों ने मेले में जमकर खरीदारी की और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ उठाया। सबसे पहले उत्तराखंड से आए कलाकारों ने प्रसिद्ध लोक नृत्य की प्रस्तुति देने के लिए जैसे ही मंच पर पहुंचे और अपने वाद्य यंत्रो पर थाप लगाई तो पर्यटक एकाएक इस घाट के सामने एकत्रित हो गए। 

उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला की तरफ से कुरुक्षेत्र उत्सव में पहुंचे इन कलाकारों ने सुबह और सायं के समय खूब रंग जमाया। महोत्सव के तीसरे दिन हरियाणा के बंब रसिया, राजस्थान के बाजीगरों और बहरूपियों ने भी पर्यटकों का खूब मनोरंजन किया। केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि इस उत्सव में 10 दिसंबर तक अलग-अलग चरणों में विभिन्न प्रदेशों के लोक कलाकार पर्यटकों का मनोरंजन करेंगे। महोत्सव में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रदेशों के कलाकारों को एनजेडसीसी के माध्यम से आमंत्रित किया गया है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति दे रहे हैं।
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