बाबा जवंद सिंह की समाध पर उमड़े श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
देश के अति संवेदनशील हवाई अड्डों में शामिल श्री गुरु रामदास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट की हवाई पट्टी से कुछ मीटर दूर स्थित गुरुद्वारा संतसर में माथा टेकने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ आई। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) इस गुरुद्वारा साहिब में स्थित बाबा जवंद सिंह जी की समाधि में प्रति वर्ष उनके वार्षिक उत्सव पर माथा टेकने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हवाई पट्टी पर जाने की आज्ञा देती है।
अपनी स्थापना के बाद तीन बार विमान अपहरण के गवाह रहे इस इंटरनेशनल एयरपोर्ट में स्थित इस गुरुद्वारा में माथा टेकने के लिए सुबह से ही हवाई अड्डे के दूसरे प्रवेश द्वार के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लग गई थी। हवाई अड्डे के प्रबंधकों ने चिलचिलाती गर्मी में श्रद्धालुओं के लिए शामियाने का प्रबंध किया हुआ था।
बाबा जवंद सिंह की याद में बने इस गुरुद्वारा साहिब की मान्यता उस समय बढ़ गई थी, जब भारत-पाकिस्तान के बीच हुए वर्ष 1965 और 1971 के दो युद्धों में बमबारी के बावजूद इस हवाई अड्डे का कोई नुकसान नहीं हुआ था।
हवाई अड्डा के निदेशक मनोज चंसोरिया ने कहा कि मंगलवार शाम तक गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पांच से छह लाख तक पहुंच गई थी। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला पुलिस और नागरिक प्रशासन की मदद से हवाई अड्डे की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यह गुरुद्वारा छह दशक पहले अस्तित्व में आया था।
1965 और 1971 के भारत-पाक के युद्ध के दौरान बिना किसी बाधा के पाक विमानों की सीमा के करीब होने के बावजूद हवाई अड्डा अप्रभावित रहा था। उस समय भी इसी अस्थान पर बाबा जवंद सिंह की समाधि थी। जब भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान हवाई अड्डे को कोई भी क्षति नहीं पहुंची तो हवाई अड्डे और वायु सेना स्टेशन के तत्कालीन कर्मचारियों की बाबा जवंद सिंह की समाधि पर श्रद्धा बढ़ गई।
समय बीतने के साथ यह पूजा स्थल बन गया। हवाई अड्डे में तैनात सीआईएसएफ के जवानों ने श्रद्धालुओं की तलाशी ली। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों ने श्रद्धालुओं द्वारा गुरुद्वारा साहिब में चढ़ाने के लिए लाया गया प्रसाद भीतर नहीं जाने दिया।
चंसोरिया ने कहा कि उन्होंने यात्रियों को हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए सचेत किया था, जो अपनी अनुसूची उड़ान के समय से पहले कम से कम तीन घंटे पहले पहुंचे। एएआई हर दिन इस इंटरनेशनल हवाई अड्डे से उड़ान भरने व लैंडिंग करने वाली 28 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को कंट्रोल करती है। हवाई अड्डे में आने वाले यात्रियों को भी असुविधा न हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किए गए हैं।
एक दशक पहले सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एएआई ने इस गुरुद्वारा साहिब को हवाई अड्डे के संचालन क्षेत्र से बाहर गुरुद्वारा स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन गुरुद्वारा प्रबंधन समिति द्वारा इस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया गया था। इस प्रस्ताव के रद्द होने के बाद एएसआई ने इस गुरुद्वारा साहिब तक जाने के लिए एक नए वैकल्पिक मार्ग के निर्माण का प्रस्ताव भी दिया था। जिसे भी अस्वीकार कर दिया गया।