हाई रिस्क केस में गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग स्पेशल ट्रीट करेगा। जच्चा-बच्चा का जीवन सुरक्षित रहे, इस मकसद के साथ विभाग ने यह कदम उठाया है।
इसके लिए बकायदा योजना तैयार कर उसे अमलीजामा पहना दिया है। योजनानुसार रेफर हुई महिला मरीज को ओपीडी में नहीं, बल्कि सीधा लेबर रूम ले जाएगा।
डॉक्टर को कॉल की जाएगी। बताया गया है कि किसी भी पीएचसी-सीएचसी से हाई रिस्क हालत में जब गर्भवती को सिविल अस्पताल रेफर किया जाएगा तो उसे एक गुलाबी पर्ची बनाकर दी जाएगी।
यह कार्ड रेफर करते समय स्वास्थ्य केंद्र में ऑन ड्यूटी चिकित्सक व स्टाफ बना देगा। एलएनजेपी पहुंचने पर पेशेंट को तुरंत अटेंड किया जाएगा।
इस बाबत जिला सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों को बता दिया गया है और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट द्वारा हिदायत दी गई है कि गुलाबी पर्ची लेकर पहुंचने वाली महिला को ओपीडी में नहीं, बल्कि सीधा लेबर रूम में अटेंड करें।
बता दें कि कई बार भीड़ होने से काफी समय बाद गर्भवती महिला का ओपीडी में चेकअप किया जाता है। लेकिन अब अस्पताल पहुंचने वाली गर्भवती महिला के परिजनों को सिर्फ गुलाबी पर्ची दिखानी होगी।
इसके बाद का काम ड्यूटी पर तैनात स्टाफ का होगा। पहले तो स्टाफ सदस्य महिला को तुरंत लेबर रूम में ले जाएंगे और फिर डॉक्टर को कॉल करेंगे। मतलब साफ है कि गुलाबी स्लिप का जादू चलेगा और मरीजों की भीड़ होने के बावजूद इस महिला मरीज को स्पेशल ट्रीटमेंट मिलेगा।
लेबर रूम में लगाई पर्ची
एलएनजेपी अस्पताल के लेबर रूम में लगाई गई इस गुलाबी स्लिप में साफ लिखा है कि गुलाबी रंग वाली पर्ची लेकर यहां पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को तुंरत प्रभाव से अटेंड किया जाएगा। महिला मरीज को ओपीडी में न भेजकर सीधा लेबर रूम में ही लिटाकर तुरंत डॉक्टर को बुलाना है।
जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए : एमएस
एलएनजेपी में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. मुकेश ने बताया कि हाई रिस्क वाली महिला का केस कुछ अलग होता है। इसलिए विभाग ने उसे स्पेशल ट्रीट करने की योजना बनाई है।
उनके अनुसार एक केस में तो गर्भवती महिला का रक्तचाप नॉर्मल होता है। लेकिन जिस महिला का ब्लड प्रेशर हाई होगा। उसे हाई रिस्क केस का नाम दिया गया है। ऐसे केस को तुरंत प्रभाव से अटेंड करने के आदेश दिए हैं, ताकि जच्चा-बच्चा सुरक्षित रह सकें।