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Haryana: डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज, पीजीआई रोहतक में 50 फीसदी तक पद खाली

Mon, 05 Aug 2024 11:43 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा के अस्पतालों में लंबे समय से डॉक्टरों, नर्स, फार्मासिस्ट समेत अन्य सहयोगी स्टाफ की कमी है। कुछ इसी प्रकार की स्थिति प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों की है।
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मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी। - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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एक तरफ हरियाणा सरकार प्रदेश के हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का ड्रीम प्रोजेक्ट लेकर चल रही है, दूसरी ओर पहले से स्थापित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी बनी हुई है। कर्मचारियों और अधिकारियों का यह टोटा कोई अभी नहीं हुआ, बल्कि कई साल से यह स्थिति है। 

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आलम ये है कि प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान पीजीआई रोहतक में 50 प्रतिशत तक पद खाली पड़े हैं, जबकि यहां सबसे अधिक मरीजों का दबाव है। डॉक्टरों और स्टाफ की कमी से मरीजों की परेशानी बढ़ने के साथ तैनात कर्मचारियों पर भी काम का दबाव बढ़ता जा रहा है। मरीजों का इलाज वाले इन मेडिकल कॉलेजों को खुद बड़ी सर्जरी की जरूरत है।

बीपीएस महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां, कल्पना चावला मेडिकल कालेज करनाल, नल्हड़ मेडिकल कालेज और फरीदाबाग के छायसां मेडिकल कालेज में भी स्टाफ की कमी हैं। यह मुद्दा कई बार विधानसभा में भी गूंज चुका है, लेकिन कई साल बीतने के बाद भी डॉक्टरों और सहयोगी स्टाफ की कमी दूर नहीं हो पाई है।

तीन नए मेडिकल कॉलेजों में डेपुटेशन पर भेजा जाएगा स्टाफ

महेंद्रगढ़-नारनौल, भिवानी और जींद में इसी साल मेडिकल कॉलेज के भवन बनकर तैयार हो जाएंगे। इन तीनों मेडिकल कॉलेजों को चलाने के लिए डॉक्टरों के साथ-साथ पैरा मेडिकल और क्लेरिकल स्टाफ की जरूरत पड़ेगी। शुरुआत में इन कॉलेजों मे डेपुटेशन पर स्टाफ भेजा जाएगा, ताकि ओपीडी शुरू हो सके। अगर ऐसा किया गया तो पहले से चल रहे मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी और बढ़ जाएगी, क्योंकि इन्हीं पांचों कॉलेजों से ही स्टाफ को नए मेडिकल कॉलेजों में भेजा जाएगा।

मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की स्थिति

मेडिकल कॉलेज                   डॉक्टरों के स्वीकृत पद       डॉक्टरों के रिक्त पद     पैरा मेडिकल स्टाफ के स्वीकृत पद     पैरामेडिकल स्टाफ के रिक्त पद

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पीजीआई रोहतक                             870                         401                                    578                                            176
बीपीएस खानपुर                              389                         207                                    267                                            185
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज         363                         134                                    186                                             133
नल्हड़ मेडिकल कॉलेज                      353                        176                                    152                                             135
छायसां मेडिकल कॉलेज                    198                        134                                     395                                             274

मेडिकल कॉलेजों में नियमों के तहत स्टाफ तैनात किया जाना चाहिए। प्रोफेसर, डॉक्टर नहीं होने से जहां मरीजों का इलाज प्रभावित होता है, वहीं, मेडिकल की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य पर भी इसका असर पड़ता है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह खाली पदों को भरने के लिए स्पेशल ड्राइव चलाए। पद खाली होने के चलते डॉक्टरों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। -डा. रणबीर सिंह दहिया, रिटायर्ड प्रोफेसर, पीजीआई रोहतक।

डॉक्टरों और स्टाफ की कमी को करेंगे दूर: स्वास्थ्य मंत्री

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कमल गुप्ता का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं है कि डॉक्टर कम हैं, लेकिन हरियाणा सरकार इस कमी को दूर करने में लगी है। हरियाणा सरकार का विजन है कि हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोला जाए। इन कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई कराई जा रही है, थोड़े समय में हम डॉक्टरों की कमी पूरी कर पाएंगे। इससे सुचारु रूप से लोगों की सेहत का ध्यान रखा जाएगा।

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