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'शहीदों की न कोई जात होती है, न ही कोई धर्म'

Thu, 01 May 2014 01:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब कला भवन-16 के ओपन एयर थिएटर में बुधवार शाम सीएस सिंदरा के लिखे नाटक ‘राम मोहम्मद सिंह आजाद’ का मंचन किया गया। सीएस सिंदरा को समर्पित तीन दिवसीय शॉर्ट प्ले फेस्टिवल के आखिरी दिन बुधवार को हुए नाटक का निर्देशन आशीष शर्मा ने किया।
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नाटक की शुरुआत होती है चार अलग-अलग धर्म के लोगों से। यह लोग शहीद ऊधम सिंह की वर्षगांठ पर फूल चढ़ाने आए हैं। इसी बीच एक विदेशी वहां आता है और सब को उनके धर्मों के अनुसार भड़काता है। हिंदू को कहता है कि ऊधम सिंह हिंदू था, मुस्लिम को कहता है कि ऊधम सिंह मुस्लिम था।

इसी तरह ईसाई और सिख को भी ऐसे ही कहता है। इसके बाद चारों एक दूसरे से लड़ने लगते हैं। विदेशी उन्हें आपस में लड़ाकर खुद राज करने की सोचता है। इस बीच ऊधम सिंह के बुत पर एक बुजुर्ग हार चढ़ाने आता है। चारों उससे उसका धर्म पूछते हैं, इस पर वह कहते हैं कि इससे धर्म का क्या लेना-देना।
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चारों बुजुर्ग को वहां से जाने को कहते हैं। यह सब सुनकर बुत बने ऊधम सिंह में जान आ जाती है। बुत सभी से कहता है कि उसने यह दिन देखने के लिए अपनी जान नहीं दी थी। शहीदों का कोई धर्म या जाति नहीं होती। वह हर धर्म में यकीन करता है, यह सब देख वह विदेशी को पकड़कर उनके सामने कर देता है और कहता है कि यही है हर लड़ाई की वजह।

चारों को जब अपनी गलती का पता चलता है तो वह विदेशी को वहां से मारपीट कर भगा देते हैं। सीएस सिंदरा के लिखे इस नाटक में आशीष शर्मा, विक्की बावा, गोल्डी लांबा, हरमिंदर सिंह, माहित कुमार, हैरी, रोबिन और कपिल ने अभिनय किया।   
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