डॉ. दलजीत चीमा।
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पंजाब के नए डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की नियुक्ति पर उठा विवाद थम नहीं रहा है। शिरोमणि अकाली दल ने कांग्रेस पर राजनीतिक प्रतिशोध से काम करने का आरोप लगाया है। शिअद ने चुनाव आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। साथ कहा है कि राज्य में नियमित डीजीपी नियुक्त किया जाए। शिअद प्रवक्ता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने चट्टोपाध्याय की नियुक्ति पर कहा कि चार दिन के लिए कार्यवाहक डीजीपी बनाना उचित नहीं है।
शिअद मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते करते हुए चीमा ने भारत निर्वाचन आयोग से अपील कर कहा कि कांग्रेस सरकार, शिरोमणि अकाली दल के खिलाफ पुलिस प्रशासन में तदर्थ नियुक्तियों में बदलाव करने पर तुली है। कांग्रेस सरकार ने मौजूदा आईपीएस सहोता की जगह एस चट्टोपाध्याय को 16 दिसंबर को आधी रात में नए कार्यवाहक डीजीपी के रूप में नियुक्त किया है। क्योंकि वह पत्र बाहर आ गया था, जिसमें अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल तथा बिक्रम सिंह मजीठिया सहित शीर्ष नेताओं को झूठे मामलों में फंसाने के कांग्रेस सरकार के संकल्प पर सवाल उठाया गया है।
चीमा ने कहा कि यह नियुक्ति इस तथ्य के बावजूद की गई कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) 21 दिसंबर को नियमित डीजीपी की नियुक्ति के बारे में निर्णय लेने वाला है और चट्टोपध्याय शीर्ष पद के लिए विचार के लिए चुने गए उम्मीदवारों में से भी नही हैं।
चीमा ने कांग्रेस सरकार से यह बताने के लिए कहा कि चट्टोपध्याय को चार दिन के लिए नियुक्त करने की तत्काल आवश्यकता क्या थी। यह नियुक्ति इस परिकल्पना को मजबूत करती है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू लंबे समय से इस अधिकारी की नियुक्ति का समर्थन कर रहे हैं। यह भी साफ है कि अधिकारी को कांग्रेस के एजेंडे को लागू करने के लिए कार्यवाहक डीजीपी का प्रभार दिया गया है। उन्होंने चट्टोपध्याय के अतीत के बारे में भी विवरण दिया, जिसमें यह तथ्य भी शामिल है। उन्होंने पहले भी बादल परिवार को आय से अधिक संपत्ति के एक कथित मामले में फंसाने की कोशिश की थी, जिसमें परिवार को बरी कर दिया गया था।