प्राचीन इमारतों को बचाने के लिए बनेगी कमेटी
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एसजीपीसी ने गुरुद्वारा साहिब की प्राचीन इमारतों, पेड़ों और अन्य ऐतिहासिक स्थलों को बचाने के लिए एक विरासती कमेटी गठित करने का फैसला लिया है। इस कमेटी में केंद्र सरकार के पुरातत्व विभाग, पुराने दस्तावेजों के रखरखाव के विशेषज्ञों व प्राचीन इमारतों को सुरक्षित रखने के तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।
एसजीपीसी के चीफ सेक्रेटरी डॉ. रूप सिंह ने बताया कि तरनतारन श्री गुरुद्वारा साहिब की 200 वर्ष पुरानी दर्शनी ड्योढ़ी को बाबा जगतार सिंह द्वारा गिराए जाने पर विरोध झेलने के बाद यह फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि सिख इतिहास को मिटने से बचाने के लिए अब कार सेवा के संतों के स्थान पर अब तकनीकी माहिरों की मदद ली जाएगी। कार सेवा के नाम पर गिराई गई दर्शनी ड्योढ़ी का पुनर्निर्माण एसजीपीसी तकनीकी विशेषज्ञों से करवाएगी।
दर्शनी ड्योढ़ी गिराने के मामले की होगी जांच
उन्होंने बताया कि बाबा जगतार सिंह द्वारा दर्शनी ड्योढ़ी गिराने के मामले की जांच के लिए एसजीपीसी ने एक सब-कमेटी का गठन किया है। वहीं बाबा जगतार सिंह ने इस मामले में माफी मांग कर एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल कर एसजीपीसी को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।
हालांकि जगतार सिंह ने इस बात का जिक्र नहीं किया कि एसजीपीसी ने एक प्रस्ताव पारित कर ड्योढ़ी की कार सेवा स्थगित कर दी थी। उन्होंने कहा कि रात के अंधेरे में ड्योढ़ी को गिराया जाना एसजीपीसी के प्रबंध में सीधा दखल है। वे माफी मांगने से दोष मुक्त नहीं हो सकते।
पहली बार लगे कार सेवा करने वाले संतों पर आरोप
उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के इतिहास में यह पहली बार है कि कार सेवा करने वाले संतों पर संगत की भेंट लेने के आरोप लगाए गए हैं। डॉ. रूप सिंह ने स्वीकार किया की कई कार सेवा के संत सेवा के नाम पर संगत की माया से अपने कारोबार चला रहे हैं।