यह दुखद है कि वर्तमान भाजपा सरकार भी कांग्रेस के नक्शेकदम पर चली और सिखों की सर्वोच्च संस्था को तोड़ने में सफल रही है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी को तोड़ने और सिख सत्ता को बांटने की राजनीति सही नहीं है। सरकारों को सिखों के मुद्दों में दखल नहीं देना चाहिए। केंद्र की समय-समय की सरकारें सिख शक्ति को कमजोर करती आ रही हैं।
एसजीपीसी सिखों की एक बड़ी शक्ति थी जिसे एक साजिश के तहत तोड़ा गया है। एसजीपीसी के साथ-साथ तख्त श्री पटना साहिब प्रबंधक कमेटी, तख्त श्री हजूर साहिब प्रबंधक कमेटियों को भी कमजोर किया जा रहा है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी तो पहले ही केंद्र सरकार के इशारों पर काम कर रही है।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी संबंधी फैसला सिख भावनाओं के अनुसार नहीं: जत्थेदार
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने प्रतिक्रिया दी है कि फैसला सिख भावनाओं के अनुसार नहीं है। यह फैसला सिखों की एकता को तोड़ने वाला है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि देश की आजादी के बाद 1947 से आज तक के इतिहास में फैसला शिरोमणि कमेटी का भौगोलिक कत्ल है।
उन्होंने कहा कि भरतीय संसद को मजबूत व अखंड रखने का संकल्प लेने वाले भारतीय हुक्मरानों की ओर से कुछ सिख चेहरों का इस्तेमाल कर कानून की आड़ में आखिर सिख पार्लियामेंट को खंडित कर ही दिया है। इसका अहसास हमें काफी समय के बाद होगा। काश! कि स्वतंत्र राज प्रबंध के लिए भी सिख भावनाओं को सत्कार हो।