एचएसजीपीसी और हुड्डा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने प्रचार सामग्री को मुख्य हथियार बनाया है।
पोस्टर बांटकर प्रचार किया जा रहा है कि हुड्डा सरकार ने यह मनी बिल पास किया है। जिसके माध्यम से गुरुद्वारा साहिबान के गुल्लक पर कब्जा किया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर एसजीपीसी और सिख जत्थेबंदियों की ओर से इसके खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान भी किया है। पोस्टर छपवाकर संगत में बांटने का सिलसिला रविवार को सुबह ही आरंभ हो गया।
यही नहीं ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी में एक बड़ा बैनर लगाकर शीश नवाने के लिए आने वाली संगत को भी जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रचार सामग्री में भी हुड्डा सरकार पर साधा निशाना
बैनर में बिल को गलत और गुरुद्वारा साहिबान पर कब्जा, सिख कौम को बांटने, गुरु घर की महान हस्तियों को सरकारी नौकर बनाने जैसी बातें लिखकर संगत को हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान किया है। इतना ही नहीं, श्री अकाल तख्त साहिब को भी कमजोर नहीं होने देने की अपील की गई है।
वहीं पंजाब से निहंग साहिबान के जत्थे भी गुरुद्वारा साहिब पहुंचने लगे हैं। यहां आते ही इन्होंने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सहित हुड्डा सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।
पत्रकारों के सामने निहंग साहिबान ने कहा कि कौम का बंटवारा बर्दाश्त नहीं होगा, इसके लिए कोई भी कुर्बानी देने के लिए वे तैयार हैं।
यहां पहुंच रहे निहंग साहिब व सिख संगत निरंतर जो बोले सो-निहाल के उद्घोष कर रही है। दिन में सैकड़ों बार इस उद्घोष की गूंज गुरुद्वारा साहिब परिसर में सुनाई देती है।
पंजाब से आ रही है सिख संगत
पंजाब से सिख संगत के यहां पहुंचने का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। काफी संख्या में संगत गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी में पहुंची।
धीरे-धीरे संगत के यहां आने से शिरोमणि अकाली दल के हौसले भी बुलंद नजर आ रहे हैं। जबकि एसजीपीसी पदाधिकारी भी स्वयं को पहले से अधिक अच्छी स्थिति में मान रहे हैं।
विर्क सहित अकाली नेता रहे मौजूद
स्थिति के मद्देनजर जहां शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अमृतसर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क गुरुद्वारा साहिब में डटे हैं। वहीं शिरोमणि अकाली दल हरियाणा के सैकड़ों कार्यकर्ता भी मौजूद हैं।
इन अकाली नेताओं में शिअद नेता सरणजीत सिंह सौथा, हरभजन सिंह मसाना, तजिंदरपाल सिंह ढिल्लो, जरनैल सिंह बोढी, कर्मबीर सिंह कंग, जसवंत सिंह दुनियामाजरा प्रमुख रूप से शामिल हैं।