एसजीपीसी प्रधान गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कहा कि पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब में रोजाना 500 संगत के दर्शन करने की पाबंदी तक सीमित नहीं रखा जा सकता। करतापुर कॉरिडोर के निर्माण के बाद देश-विदेश की संगत गुरुद्वारा करतारपुर के दर्शनों के लिए उमड़ पड़ेगी। इस गुरुद्वारा साहिब के दर्शनों की चाहत बीते 70 वर्षों से सिख अपने दिल में संजोए हैं। इसलिए रोज 500 संगत के दर्शन कर पाएंगे, यह पाबंदी ठीक नहीं है। पाकिस्तान सरकार यह शर्त न रखे। गुरुद्वारा साहिब के खुले दर्शन-दीदार संगत को होने चाहिए।
गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने के लिए विदेशों से सैकड़ों लोग पहुंचेंगे। इसलिए पाकिस्तान सरकार की ओर से श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए तय गए शाम पांच बजे तक के समय को भी बढ़ाना चाहिए। लौंगोवाल एसजीपीसी स्थित अपने दफ्तर में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस संदर्भ में वह भारत सरकार से बातचीत करेंगे की 500 श्रद्धालुओं की पाबंदी हटाई जाए। जब वह इस महीने श्री गुरु नानक देव जी के 550 वें प्रकाश पर्व के समारोह को अंतिम रूप देने के लिए एक शिष्टमंडल के साथ पाकिस्तान जायेंगे तब वह पाकिस्तान अकाफ बोर्ड के अधिकारियों से भी बात करेंगे।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार की ओर से श्री करतापुर साहिब के दर्शन के लिए रखी पासपोर्ट की शर्त भी जायज नहीं है। संगत के पहचान पत्र की वैधता की जांच के बाद उसे करतारपुर कॉरिडोर से गुरुद्वारा साहिब के दर्शनों की आज्ञा दी जानी चाहिए। कई बुजुर्गों के पास पासपोर्ट नहीं हैं, न ही पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया में उलझना चाहते हैं। इसलिए भारत सरकार इस संदर्भ में पाकिस्तान सरकार से बातचीत करे। इस संदर्भ में वह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ बातचीत भी करेंगे। याद रहे कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर के निर्माण के बाद इसी रास्ते श्रद्धालु श्री करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए जायेंगे। निर्माण कार्यों को शुरू कराने के लिए दोनों सरकारों ने शिलान्यास रख दिए हैं।