पंजाब के मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में पिछले कुछ दिनों में गिरफ्तार सभी निर्दोष युवकों की तत्काल रिहाई और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) को हटाने की मांग की गई। मुख्यमंत्री की श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के खिलाफ की गई टिप्पणियों की भी आलोचना की गई है। इसमें साफ तौर पर कहा गया कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। पत्र में पंजाब के मुख्यमंत्री को सलाह दी गई कि वे वर्तमान स्थिति का बहुत गंभीरता से अध्ययन करें और पंजाब के हितों के खिलाफ जाने से बचें।
अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार करने की आड़ में बड़ी संख्या में निर्दोष युवाओं को गिरफ्तार करना सही नहीं है। इस घटना से देश में सिखों के खिलाफ साजिश के तहत नैरेटिव तैयार किया जा रहा है। यह सिख समुदाय के साथ-साथ पंजाब के लिए भी अच्छा नहीं है। पत्र के माध्यम से याद दिलाया गया कि पंजाब ने हमेशा भारत की संस्कृति और अपनी सीमाओं की रक्षा करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। पंजाब के सरोकार श्री गुरु नानक देव जी के अधिकार, सत्य और मानवता के कल्याण पर आधारित हैं।
सिखों ने हमेशा देश के लिए बलिदान दिया है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ये बलिदान 80 प्रतिशत से अधिक था लेकिन देश की आजादी के बाद सरकारों ने हमेशा सिखों के मुद्दों के प्रति उदासीनता की नीति अपनाई है। इससे सिख समुदाय के भीतर नाराजगी है। सिखों की इन चिंताओं को समझे बिना पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में नेतृत्व करना संभव नहीं है।
शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि मौजूदा हालात की जिम्मेदारी सीधे तौर पर पंजाब और केंद्र सरकार पर है। मुख्यमंत्री भगवंत मान वास्तविकता को समझने के बजाय सिखों के सर्वोच्च स्थान श्री अकाल तख्त साहिब और जत्थेदार साहिब के बारे में निम्न स्तर की टिप्पणी कर रहे हैं। श्री अकाल तख्त साहिब की गरिमा और पंथक नेतृत्व किसी सांसारिक सिंहासन की तरह नहीं है। बल्कि यह गुरु साहिब द्वारा दी गई विचारधारा से सैद्धांतिक और निर्देशित है।