पत्रकारो से बातचीत करते एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी।
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने परंपराओं, संस्कृति और अल्पसंख्यकों की विशिष्ट पहचान के संभावित नुकसान के बारे में चिंताओं का हवाला देते हुए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का विरोध किया है। उनकी टिप्पणी शिरोमणि अकाली दल के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूरे देश में यूसीसी के कार्यान्वयन से अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
धामी ने कहा कि एसजीपीसी इसका खुलकर विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि खालसा की हस्ती आजाद व न्यारी है। इस पर कोई कोड लागू नहीं होता। वैसे भी इस कोड के लागू होने से हमारी संस्कृति खत्म हो जाएगी। लोगों की भावनाएं भी आहत होंगी। इसलिए एसजीपीसी ने शुरुआत से ही इस कोड का विरोध किया है और आगे भी करती रहेगी। यह लागू नहीं होना चाहिए। वह गुरुद्वारा नौवीं पातशाही बहादुरगढ़ साहिब में पहुंचे थे।
पाकिस्तान में सिखों की सुरक्षा यकीनी बनाए केंद्र
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में सिखों की सुरक्षा यकीनी बनाने के लिए केंद्र को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए। ऐसा न हो कि पाकिस्तान में भी अफगानिस्तान जैसे हालात पैदा हो जाएं। अगर ऐसा हो गया तो फिर वहां के गुरु घरों की देखरेख कौन करेगा? पाकिस्तान सरकार को भी इस मसले पर ध्यान देना चाहिए।
मान ने खालसा पंथ की रूह पर हाथ डाला
धामी ने आगे कहा कि पंजाब की मान सरकार ने सिख गुरुद्वारा अधिनियम-1925 में संशोधन की बात कहकर खालसा पंथ की रूह पर हाथ डाला है। सरकार को ऐसा संशोधन करने का अधिकार नहीं है। यह गैर संवैधानिक है। अगर सिख कौम इस मसले पर आज चुप रही तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। इस मसले पर वह केंद्रीय गृह मंत्री से भी मिलेंगे। पंजाब के राज्यपाल को भी इस मसले पर मूल्यांकन करना चाहिए।