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दो खुलासेः सेना ने एसजीपीसी को लौटा दिया था खजाना, 12 करोड़ में बेचा हस्तलिखित गुरु ग्रंथ साहिब

Mon, 10 Jun 2019 07:56 AM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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लाइब्रेरी और किताबें - फोटो : फाइल फोटो
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1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान गायब हुए सिख रेफरेंस लाइब्रेरी के खजाने को लेकर दो बड़े खुलासे हुए हैं, जिन्हें जानकर सभी हैरान रह जाएंगें। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भारतीय सेना श्री दरबार साहिब परिसर स्थित सिख रेफरेंस लाइब्रेरी का जो अनमोल खजाना ट्रंकों में भर कर ले गई थी, उसे बाद में एसजीपीसी को लौटा दिया गया था। इसके बाद कुछ जत्थेदारों और तत्कालीन अकाली नेताओं ने सिखों की इन बहुमूल्य धरोहरों को विदेशों में बेच दिया।
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यह खुलासा सेना की तरफ से एसजीपीसी को सौंपे गए दस्तावेजों से हुआ है। सैन्य सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना ने सिख रेफरेंस लाइब्रेरी का खजाना सात बार एसजीपीसी को अलग-अलग ढंग से वापस किया है। केंद्र सरकार ने इस खजाने की पहली खेप सितंबर 1984 को लौटा दी थी। खजाना पाने की रसीद पर एसजीपीसी की तरफ से उसके तत्कालीन सचिव भान सिंह और एक अन्य अधिकारी कुलवंत सिंह के हस्ताक्षर हैं।

वहीं, सेना की तरफ से सैनिक अधिकारी पीएस साहनी, आरपी नैयर और एसएस ढिल्लों के हस्ताक्षर हैं। इस रसीद में 453 आइटम प्राप्त करने की जानकारी है। वापस की गई इस खेप में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 185 स्वरूप शामिल थे।
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भगत सूरदास रचित धार्मिक ग्रंथ भी बेच दिया गया

सूत्रों की मानें तो 1984 से लेकर 1996 तक एसजीपीसी के चुनाव के बाद जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा के अध्यक्ष बनने तक सिख रेफरेंस लाइब्रेरी का खजाना धीरे-धीरे लूटा गया। एसजीपीसी के कुछ तत्कालीन अधिकारियों, सदस्यों और कुछ जत्थेदारों ने सेना द्वारा सिख रेफरेंस लाइब्रेरी का खजाना वापस करने का शोर मचाया। दूसरी तरफ एक योजनाबद्ध ढंग से खजाना विदेश में भेज कर भारी-भरकम राशि हड़पी गई।

1984 में एसजीपीसी द्वारा नियुक्त किए गए एक जत्थेदार ने सिख रेफरेंस लाइब्रेरी में सुशोभित दशम पिता के हस्ताक्षर किए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप को लंदन में चार हजार पाउंड में बेच दिया था। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का हस्तलिखित पावन स्वरूप 12 करोड़ में अमेरिका में बेचा गया। लाइब्रेरी में रखा भगत सूरदास रचित धार्मिक ग्रंथ भी बेच डाला गया।

महाराजा रणजीत सिंह की एक बहुमूल्य पेंटिंग को मरम्मत के नाम पर विदेश भेजा गया, बाद में उसे वहीं बेच दिया गया। लाइब्रेरी के इस बहुमूल्य खजाने को बेचने में एसजीपीसी के तत्कालीन अधिकारी और कुछ धार्मिक नेता शामिल हैं।

कई बहुमूल्य पेंटिंग ऐसी, जिनका कोई सुराग नहीं

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसजीपीसी के एक सदस्य ने भारतीय सेना से कुछ बहुमूल्य पेंटिंग प्राप्त की थी। यह पेंटिंग अब कहां है, क्योंकि सिख रेफरेंस लाइब्रेरी में यह पेंटिंग नहीं लौटाई गई। एसजीपीसी के इस सदस्य की कभी तूती बोलती थी। अब वे दुनिया से कूच कर चुके हैं।

एसजीपीसी ने 13 जून को बुलाई बैठक
सिख रेफरेंस लाइब्रेरी में सुशोभित बहुमूल्य खजाने को खुर्द-बुर्द करने के इस मामले पर एसजीपीसी गंभीर है। पहली बार है जब इस संवेदनशील मामले में बैठक बुलाई गई है। यह बैठक 13 जून को एसजीपीसी के दफ्तर में होगी। एसजीपीसी ने कमेटी के पूर्व व वर्तमान अधिकारियों को भी शामिल होने का पत्र भेजा है। एसजीपीसी के चीफ सेक्रेटरी डॉ. रूप सिंह के अनुसार यह मामला बहुत ही गंभीर है। इस बारे में ठोस निर्णय होगा।

कुछ मीडिया कर्मियों की मौजूदगी में खोले गए थे ट्रंक
एसजीपीसी के पूर्व सचिव दलमेघ सिंह के कार्यकाल के दौरान भारतीय सेना ने कुछ ट्रंक भेजे थे। सील किए गए इन ट्रंकों को कुछ मीडिया कर्मियों के सामने खोला गया था, जिसमें कुछ कपडे़, एक रिवाल्वर और अन्य सामान निकला था। इससे पहले या बाद में मिले सामान को कभी मीडिया को नहीं दिखाया गया।
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अमर उजाला की खबर के बाद सुखबीर ने अमित शाह के सामने उठाई थी मांग

ऑपरेशन ब्लू स्टार की 35वीं बरसी के अवसर पर अमर उजाला ने ‘सिख रेफरेंस लाइब्रेरी का बहुमूल्य खजाना नहीं ढूंढ पाई शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके एक दिन बाद शिअद अध्यक्ष सांसद सुखबीर सिंह बादल ने एक शिष्टमंडल के साथ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ मिलकर इस खजाने को लौटने की मांग की थी। इसके बाद अब सेना के सूत्रों द्वारा खजाना लौटाने के बारे में जानकारी दी गई।

इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। इस बैठक में सुखबीर ने ऑपरेशन ब्लू स्टार की नए सिरे से भी जांच की मांग की थी। 35 साल से एसजीपीसी ने श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने के लिए आने वाले सभी राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और रक्षा मंत्रियों को ज्ञापन देकर खजाना लौटाने की मांग की। पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने स्पष्ट कर दिया था कि भारतीय सेना के पास सिख रेफरेंस लाइब्रेरी का कोई खजाना नहीं है।
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