शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एजसीपीसी) के अध्यक्ष के चुनाव 29 को हैं। इसी बीच एसजीपीसी से निकाले गए 15 मुलाजिमों ने दो दिन पहले अपना फैसला सुना दिया कि वो सिख धर्म को छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाने से पहले 27 नवंबर को श्री अकाल तख्त साहिब पर अंतिम बार अरदास करके अपने सभी ककार (कंघा, केश, कृपाण, कच्छेरा और कड़ा) सुपुर्द कर देंगे।
सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब के फरमान के आगे सभी मुलाजिमों ने अपना निर्णय बदल लिया। एसजीपीसी की ओर से गुरुद्वारा साहिब की नौकरी से निकाले गए यह 15 कर्मी एसजीपीसी के अध्यक्ष प्रो किरपाल सिंह बडूंगर को पत्र भेजने के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के पास भी ज्ञापन सौंपा था। इन कर्मचारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर उन्हें एसजीपीसी ने नौकरी पर बहाल न किया तो वह सिख धर्म छोड़ देंगे।
सोमवार को मुलाजिमों की अगुवाई कर रहे दिलबाग सिंह ने कहा कि उन्हें एसजीपीसी के पूर्व अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ का फोन आया, बलदेव सिंह एमए व श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह का आदेश मिला कि सिख धर्म छोड़ने की बात भी मन में कभी न लाए, सिख धर्म पर लोगों के लाते हैं छोड़ते नहीं। ऐसे में हम सभी ने अपना विचार त्याग दिया है। आश्वासन मिला है। गुरू के चौखट पर अरदास की है, बाकी वाहे गुरू जाने।