डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ पंचकूला सीबीआई अदालत में जारी साध्वियों के कथित यौन शोषण के मामले में और गवाह पेश करने की मांग संबंधी याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जस्टिस दया चौधरी की बेंच बुधवार को फैसला सुनाएगी। इस मामले में बीते सप्ताह डेरे की ओर से और गवाहियां कराने की पैरवी की गई थी, हालांकि सीबीआई ने इसका कड़ा विरोध किया था। तब बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
हाईकोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के वकील एसके गर्ग नरवाना से अनिवार्य गवाहों की सूची मांगी थी। डेरे की ओर से 32 गवाहों की सूची पेश की गई, जिस पर सीबीआई के वकील सुखदीप सिंह संधु ने कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि ट्रायल को लंबा खींचने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दलील दी कि सीबीआई अदालत में डेरे की ओर से ऐसे गवाहों को पेश करने की इजाजत मांगी गई है, जिनका कोई अता पता नहीं है।
कुछ गवाहों को भेजे सम्मन वापस आ गए हैं। इसके अलावा सीबीआई के कुछ सरकारी गवाहों से पूछताछ करने के लिए डेरे के वकील नेे महीनों का समय लिया। संधु ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस स्वतंत्र कुमार के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि सरकारी गवाह पेश होने के बाद दो महीने में बचाव पक्ष को गवाहों से पूछताछ मुकम्मल करनी चाहिए।
सीबीआई के वकील ने यौन शोषण की कथित पीड़िता की ओर से दिया बयान भी बेंच के समक्ष पेश किया था। उधर, एडवोकेट नरवाना ने कहा कि सूची के गवाह अनिवार्य हैं। यौन शोषण पीड़िता का बयान था कि उसे गुरमीत राम रहीम की गुफा में जाने के लिए वहां की डेरा इंचार्ज सुदेश ने कहा था।
सूची में सुदेश का नाम भी है। यह भी कहा कि सीबीआई अदालत बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने से महफूज रख रही है और कथित बलात्कार के मौके का नक्शा बनाने वाले पुलिस अधिकारी इंद्रसेन को सीबीआई ने गवाह नहीं बनाया। इस दलील के साथ एडवोकेट नरवाना ने पंचकूला अदालत में और गवाह पेश करने की इजाजत मांगी थी।