फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानिए क्यों श्री हरमंदिर साहिब के बाहर हुई थी हिंसक झड़प

Fri, 13 Oct 2017 10:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
विज्ञापन
श्री हरमंदिर साहिब के बाहर चले भाले
विज्ञापन
श्री हरमंदिर साहिब परिसर के अंदर विवाद तब शुरू हुआ, जब सरबत खालसा के जत्थेदारों के हुक्मनामे पर गुरुद्वारा श्री घल्लुघारा साहिब गुरदासपुर की प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मास्टर जौहर सिंह श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश होने पहुंचे।
विज्ञापन


मास्टर जौहर सिंह अपने साथियों के साथ हरमंदिर साहिब में जैसे ही श्री अकाल तख्त साहिब पर माथा टेककर कीर्तन श्रवण करने लगे, उन्हें एसजीपीसी टास्ट फोर्स और एसजीपीसी के कर्मचारियों ने घेर लिया। वे उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब से उठाकर हरमंदिर साहिब परिसर के बाहर ले गए। मास्टर जौहर सिंह का आरोप है कि इस दौरान उनका मोबाइल गिर गया, जिसे एक एसजीपीसी कर्मचारी ने उठा लिया। मोबाइल वापस न करने पर विवाद और बढ़ गया।

जैसे ही एसजीपीसी के कर्मचारी मास्टर जौहर सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय वाले जोड़ा घर के बाहर छोड़कर अंदर जाने लगे, इतने में सरबत खालसा के समर्थक वहां पहुंच गए। वे जौहर सिंह को वापस श्री अकाल तख्त साहिब की ओर लेकर जाने लगे तो एसजीपीसी टास्क फोर्स ने सभी को आगे बढ़ने से रोक दिया और तलवार-भाले निकाल लिए। इस बीच दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की हुई। इस दौरान भाले से किए गए हमले में सतनाम सिंह मनावा का बायां हाथ गंभीर रूप से जख्मी हो गया।
विज्ञापन
Trending Videos

श्री हरमंदिर साहिब के बाहर चले भाले
वहीं जरनैल सिंह सखीरा के कपड़े फाड़ गए और पीठ पर भाला लगने से वह भी जख्मी हो गए। जबकि गोपाला के मुंह पर घूंसा लगने से पगड़ी उतर गई। इतने में सरबत खालसा के जत्थेदार भी श्री हरमंदिर साहिब के अंदर से दौड़ते हुए मौके पर पहुंच गए।

आरोप था कि उन्हें भी हरमंदिर साहिब कैंपस में एसजीपीसी और उसकी टास्क फोर्स ने बैठक नहीं करने दी। मामला कुछ शांत होने पर सरबत खालसा के जत्थेदारों ध्यान सिंह मंड, बलजीत सिंह दादूवाल और अमरीक सिंह ने दो अन्य सिंहों के साथ श्री हरमंदिर साहिब के घंटाघर वाले प्रवेश द्वार के पास बैठक शुरू कर दी, तो एसजीपीसी टास्क फोर्स के कर्मचारियों ने एक बार फिर उन्हें ऐसा करने से रोका। इस पर सरबत खालसा समर्थक भी भड़क गए, जिसकी वजह से टास्क फोर्स के कर्मचारियों को पीछे हटना पड़ा।

मास्टर जौहर सिंह के मामले में एक जांच कमेटी गठित की गई थी। कमेटी की रिपोर्ट में पूरे मामले में जौहर सिंह की लापरवाही सामने आई। इसी वजह से जौहर सिंह को सजा सुनाई गई है।
- ध्यान सिंह मंड,  सरबत खालसा के जत्थेदार।
विज्ञापन

श्री हरमंदिर साहिब के बाहर चले भाले
गुरुद्वारे में दुराचार को लेकर जौहर सिंह को पद से हटाया :
कुछ देर बाद घंटाघर द्वार के पास सरबत खालसा के जत्थेदारों ने बैठक कर मास्टर जौहर सिंह को हुक्मनामा सुनाते हुए गुरुद्वारा साहिब के ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से हटा दिया। मास्टर जौहर सिंह को सात दिन के लिए श्री हरिमंदिर साहिब में रोज एक एक घंटा कीर्तन सुनने, बर्तन साफ करने, जूते साफ करने की तनख्वाह लगाई गई।

यह सजा पूरी करने के बाद मास्टर जौहर सिंह को आदेश दिए गए कि वह गुरुद्वारा छोटा घल्लुघारा साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब रखवाकर उसे सुनेगा और 5100 रुपये की कड़ाह प्रसाद की देग करवा कर क्षमा मांगेगा। मास्टर जौहर सिंह पर आरोप है कि उनके प्रबंधों के अधीन गुरुद्वारा साहिब में ट्रस्ट के एक सदस्य ने एक महिला के साथ दुष्कर्म किया था। यह काम मास्टर के प्रबंधों की ढुलमुल और लापरवाही के कारण हुआ है। इसके लिए मास्टर जौहर सिंह पूरी तरह जिम्मेदार है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें