एडिशनल सेशन जज नरेश कटियार की अदालत ने भ्रष्टाचार के आरोप में एक व्यक्ति को सात साल की कैद और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
रिश्वत लेने का यह मामला वर्ष 2010 का है। उस समय पीडब्लूडी बीएंडआर करनाल में बतौर सुपरिंटेंडेंट तैनात इंद्रजीत ग्रोवर ने कांट्रेक्टर लाइसेंस के नाम पर उमेश चहल से सात हजार रुपये की रिश्वत ली थी। अब एडिशनल सेशन जज नरेश कटियार ने इंद्रजीत ग्रोवर को सजा सुना दी है।
भ्रष्टाचार की धारा 7 के तहत 3 साल की सजा और 5 हजार रुपये जुर्माना व धारा 13 के तहत 4 साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। दोनों सजा साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना न भरने की एवज में एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। विजिलेंस इंस्पेक्टर सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि ऐसे मामलों में भ्रष्टाचारियों को सजा मिलने से भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जा सकती है।