अकाली नेता मुखजीत सिंह मुक्खा के एनकाउंटर मामले में हाईकोर्ट की फटकार के बाद फर्जी मुठभेड़ के दोषी 8 में से 7 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। अमृतसर पुलिस द्वारा जून 2015 में किसी गैंगस्टर के बहाने यह फर्जी मुठभेड़ किया गया था। वहीं जो अधिकारी इन पुलिस कर्मियों को लीड कर रहा था, उसे निलंबित न कर उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। दो अन्य के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
यह जानकारी अमृतसर के पुलिस कमिश्नर सुधांशु शेखर श्रीवास्तव ने मंगलवार को हाई कोर्ट को दी है। मंगलवार को मामले की सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस आरके जैन ने पूछा कि दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई हैं। इसपर सरकार की ओर से बताया गया कि आरोपी 7 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है जिनमे एएसआई जोगिन्दर सिंह, हेड कांस्टेबल जसबीर सिंह, राजेश कुमार, बलजीत सिंह व कमलजीत सिंह और कांन्स्टेबल लव कुमार और नवजोत सिंह का नाम शमिल है।
एसआई रमेश कुमार, हेड कॉन्स्टेबल कंवलजीत सिंह और बलजीत सिंह के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। सरकार ने बताया कि मुक्खा की विधवा को पहले ही 5 लाख रुपये मुआवजा दिया जा चूका है। मुआवजे की यह राशि बढ़ाये जाने पर गौर किया जा रहा है और एक सप्ताह में इस पर भी निर्णय ले लिया जाएगा। हाईकोर्ट ने इस जानकारी के बाद सुनवाई 8 दिसंबर तक स्थगित कर दी है।
मुक्खा फर्जी मुठभेड़ मामले कि जांच के लिए गठित की गई एसआईटी इस मुठभेड़ में आठ पुलिस कर्मियों को दोषी करार दे, उनके खिलाफ कार्यवाही की जो शिफारिश कर चुकी है। उस शिफारिश के बावजूद भी कोई भी कार्यवाही नहीं किये जाने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमृतसर पुलिस कमिश्नर को तलब कर लिया था।