मेरे पिता के साथ उनके भाई जैसे संबंध रहे। ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनके साथ सरकार और पार्टी संगठन दोनों स्थानों पर कार्य करने का मौका मिला। सरकार में भी जब मैं मंत्री बनी तो वे सीनियर मंत्री थे और जब वो कांग्रेस में महासचिव थे तो मुझे बतौर सचिव उनके साथ काम करने का अवसर मिला। हर वक्त उन्होंने एक पिता की तरह मेरा मार्गदर्शन किया और अपना आशीर्वाद दिया। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इतिहास के बड़े ज्ञाता थे। उनकी सभी विषयों पर मजबूत पकड़ थी। उनके सानिध्य में काम करते हुए बहुत कुछ सीखने को मिला।
हुड्डा ने जताया प्रणब मुखर्जी के निधन पर शोक
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर शोक जताया है। हुड्डा का कहना है कि प्रणब मुखर्जी का निधन देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है। लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने विभिन्न पदों पर रहकर देश की सेवा की। प्रणब दा ने राष्ट्र की अत्यंत समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ सेवा की।
देश उन्हें एक आदर्श राजनीतिज्ञ, कुशल प्रशासक, मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत के तौर पर याद रखेगा। प्रणब मुखर्जी स्वतंत्रता सेनानी परिवार से आते थे। इसलिए उनके साथ हमारा शुरू से ही विशेष लगाव रहा। हमारी तीन पीढ़ियों स्व. चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा से लेकर दीपेंद्र सिंह हुड्डा तक को उनके साथ काम करने का सौभग्य प्राप्त हुआ।
पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के निधन पर हरियाणा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने गहरा शोक जताया है। धनखड़ ने उनको एक अमिट छाप छोड़ने वाली महान शख्सियत बताया। धनखड़ ने दु:ख जताते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में कई बार उनसे मिलने का अवसर मिला, उनसे मिलकर सदा ही सुखद एहसास हुआ, दूरदर्शी सोच रखने वाले, निर्भय और ऊर्जावान व्यक्तित्व के धनी को देश सदैव याद रखेगा।
सरपंचों को बुलाया था सहभोज पर
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी मुखर्जी ने हरियाणा के तकरीबन 100 गांवों को गोद लेकर उनको विकसित करने का बीड़ा उठाया था। उन्होंने राष्ट्रपति रहते हुए हरियाणा के पांच गांवों को गोद लिया था और राष्ट्रपति के दायित्व से मुक्त होने के बाद 96 गांवों को प्रणब मुखर्जी फाउंडेशन के माध्यम से स्मार्ट बनाने के लिए काम किया। एक बार हरियाणा के गोद लिए गांवों के सरपंचों को प्रणब दा ने सहभोज का निमंत्रण भी राष्ट्रपति भवन में दिया था। हरियाणा से प्रणव दा का विशेष स्नेह था।