यूनिटेक की दलील ठुकराते हुए राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक अहम फैसले में कहा है कि बिल्डर मंदी का बहाना बनाकर फ्लैट की कंपलीशन में देरी को सही नहीं ठहरा सकता। बिल्डर ने शिकायतकर्ता व अन्य अलाटियों से करीब 95 प्रतिशत फ्लैट की कीमत वसूल की है।
ऐसे में बिल्डर का ऐसा बहना बनाने का कोई औचित्य नहीं है। यूनिटेक शिकायतकर्ता मोहली निवासी मनीष अग्रवाल को 36 लाख 99 हजार रुपये वापस करे। इसी तरह गुड़गांव की कमलदीप कौर को 83 लाख 81 हजार रुपये वापस करने का निर्देश दिया है।
यह निर्देश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ के अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) जसबीर सिंह ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में मेसर्स यूनिटेक लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 36 लाख 99 हजार 822 रुपये वापस करे। उक्त राशि पर 15 प्रतिशत की दर से क्वार्टरली कंपाउंड इंस्टरेस्ट अदा करे। मानसिक प्रताड़ना और फिजिकल ह्रासमेंट के लिए तीन लाख रुपये मुआवजा और 50 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करे।
शिकायतकर्ता मनीश अग्रवाल निवासी सेक्टर-70 मोहाली ने यूनिटेक लिमिटेड के खिलाफ उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ में शिकायत दी थी। उन्होंने शिकायत में कहा था कि बिल्डर ने उन्हें 1485 वर्गफु ट सुपर एरिया के तीन बेडरूम का फ्लैट अलाट किया। अलाटमेंट लेटर 1 जनवरी 2012 को जारी किया गया। फ्लैट की कुल कीमत 38 लाख 48 हजार 400 रुपये थी।
शिकायतकर्ता के वकील पंकज चांदगोठिया ने दलील में कहा कि बिल्डर को 36 महीनों में यानि 16 मार्च 2014 तक फ्लैट का पजेशन देना था। 95 प्रतिशत राशि लेने के बाद भी बिल्डर फ्लैट का पजेशन देने में फेल रहा। दूसरे पक्ष ने उपभोक्ता आयोग को बताया कि मंदी के कारण देरी हुई है। उन्होंने सेवा में कोताही नहीं की है।
एक अन्य मामले में गुड़गांव निवासी कमलदीप कौर की शिकायत पर सुनवाई के बाद उपभोक्ता आयोग ने यूनिटेक को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 83 लाख 81 हजार 548 रुपये वापस करे। उक्त राशि पर 15 प्रतिशत की दर से क्वार्टरली कंपाउंड इंटरेस्ट अदा करे। साथ ही तीन लाख रुपये मुआवजा और 50 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करने का निर्देश दिया है।