रुक जाना नहीं तू कहीं हार के, चलना ही जिंदगी है...कुछ ऐसा ही जज्बा जगाने के लिए जी जान लगा देती है 80 लोगों की ये टोली, इनके जुनून को सलाम। अपनी जिंदगी के अंधेरों से लड़ते हुए उजाले की ओर बढ़ना चाहते हैं स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के वे मरीज, जिन्हें हालातों ने आज जख्मों के साथ बिस्तर पर ‘जिंदा’ रहने के लिए छोड़ दिया है।
अपने पैरों पर कभी न खड़े हो पाने वाले यह मरीज बिस्तर पर पड़े-पड़े जख्मों से इस कदर घिर जाते हैं कि उनकी मौत बहुत दर्दनाक बन जाती है। उनके इलाज में परिजनों की न केवल माली हालत बिगड़ जाती है, बल्कि कई परिवार तो पूरी तरह से बिखर जाते हैं।
ऐसे मरीजों के लिए समाज सेवा करने वाले लोगों की एक टोली है, जो उन्हें न केवल अपने लायक बनाकर नई जिंदगी शुरू करने के लिए प्रेरित करती है, बल्कि अपनी कमाई से ऐसे मरीजों का इलाज करके व्हील चेयर, दवाओं से लेकर उनकी हर जरूरत को पूरा कर रही है।
करीब 80 लोगों (56 युवा) की इस टोली में चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब समेत कुछ एनआरआई लोग भी शामिल हैं। इनमें से युवाओं का ऐसा समूह है जो स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में कभी इकट्ठा पढ़ा करता था। समाज सेवा करने वाले इन लोगों में 15 साल से लेकर 75 साल तक के लोग शामिल हैं।
इन युवाओं ने ‘सर्व ह्यूमैनिटी, सर्व गॉड चैरिटेबल ट्रस्ट’ बनाया हुआ है। सभी युवा अपनी-अपनी कमाई से इसे चलाते हैं। वे अपने काम के साथ-साथ इस ट्रस्ट के विभिन्न प्रकल्पों में पूरी तन-मन-धन से सहभागिता भी दिखाते हैं। ट्रस्ट ने हाल ही में ‘सर्व ह्यूमैनिटी सर्व गॉड’ वेबसाइट भी लॉन्च की थी।
मरीजों की सेवा के लिए इसी साल की शुरुआत में ट्रस्ट ने चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर स्थित रतवाड़ा गांव में निःशुल्क केंद्र खोला है। ट्रस्ट के प्रवक्ता स्वर्णजीत सिंह बताते हैं कि भगत पूर्ण सिंह जी की सेवा भावना से प्रेरित होकर ही उन्होंने वर्ष 2016 में इस ट्रस्ट की शुरुआत की थी।