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बेमिसालः जिंदगी से मायूस मरीजों को जीने की कला सिखाती है ये टोली, अपनी कमाई से कराते इलाज

Thu, 04 Jul 2019 03:42 PM IST
खुशबू गोयल सीमा एस आनंद, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चैरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य - फोटो : अमर उजाला
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रुक जाना नहीं तू कहीं हार के, चलना ही जिंदगी है...कुछ ऐसा ही जज्बा जगाने के लिए जी जान लगा देती है 80 लोगों की ये टोली, इनके जुनून को सलाम। अपनी जिंदगी के अंधेरों से लड़ते हुए उजाले की ओर बढ़ना चाहते हैं स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के वे मरीज, जिन्हें हालातों ने आज जख्मों के साथ बिस्तर पर ‘जिंदा’ रहने के लिए छोड़ दिया है।
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अपने पैरों पर कभी न खड़े हो पाने वाले यह मरीज बिस्तर पर पड़े-पड़े जख्मों से इस कदर घिर जाते हैं कि उनकी मौत बहुत दर्दनाक बन जाती है। उनके इलाज में परिजनों की न केवल माली हालत बिगड़ जाती है, बल्कि कई परिवार तो पूरी तरह से बिखर जाते हैं।

ऐसे मरीजों के लिए समाज सेवा करने वाले लोगों की एक टोली है, जो उन्हें न केवल अपने लायक बनाकर नई जिंदगी शुरू करने के लिए प्रेरित करती है, बल्कि अपनी कमाई से ऐसे मरीजों का इलाज करके व्हील चेयर, दवाओं से लेकर उनकी हर जरूरत को पूरा कर रही है।
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करीब 80 लोगों (56 युवा) की इस टोली में चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब समेत कुछ एनआरआई लोग भी शामिल हैं। इनमें से युवाओं का ऐसा समूह है जो स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में कभी इकट्ठा पढ़ा करता था। समाज सेवा करने वाले इन लोगों में 15 साल से लेकर 75 साल तक के लोग शामिल हैं।

इन युवाओं ने ‘सर्व ह्यूमैनिटी, सर्व गॉड चैरिटेबल ट्रस्ट’ बनाया हुआ है। सभी युवा अपनी-अपनी कमाई से इसे चलाते हैं। वे अपने काम के साथ-साथ इस ट्रस्ट के विभिन्न प्रकल्पों में पूरी तन-मन-धन से सहभागिता भी दिखाते हैं। ट्रस्ट ने हाल ही में ‘सर्व ह्यूमैनिटी सर्व गॉड’ वेबसाइट भी लॉन्च की थी।

मरीजों की सेवा के लिए इसी साल की शुरुआत में ट्रस्ट ने चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर स्थित रतवाड़ा गांव में निःशुल्क केंद्र खोला है। ट्रस्ट के प्रवक्ता स्वर्णजीत सिंह बताते हैं कि भगत पूर्ण सिंह जी की सेवा भावना से प्रेरित होकर ही उन्होंने वर्ष 2016 में इस ट्रस्ट की शुरुआत की थी।

 

मरीजों को जिंदगी की ‘सेंकेंड इनिंग’ जीना सिखाता है इमरान

स्पाइनल कोड इंजरी की वजह से हमेशा व्हील चेयर पर रहने वाले इमरान मरीजों को जिंदगी की सेकेंड इनिंग जीने की कला सिखाते हैं। अभी इस सेंटर में ऐसे 10 मरीज उपचाराधीन हैं, जिनके जख्मों को ठीक करके उन्हें बैड से व्हील चेयर पर लाने का काम किया जा रहा है। इन मरीजों के लिए व्हीलचेयर भी विशेष तरह की होती है, जिसका खर्च हजारों रुपये में होता है।

व्हीलचेयर पर लाकर इमरान जिंदगी जीने की इच्छा से मायूस हो चुके इन मरीजों को पहले तो मानसिक अवसाद और तनाव से बाहर लाता है। मानसिक चिकित्सक भी इस काम में उनकी मदद करते हैं। उनके बाद इमरान उन्हें व्हील चेयर पर ‘वैली’ (व्हीलचेयर पर रहते हुए सामान्य आदमी की तरह हर काम करने की कला) करना सिखाता है।

इसे सीखने में करीब एक महीने से अधिक समय लगता है और उसके बाद मरीज को अपने घर वापस भेज दिया जाता है। सेंटर में मरीज के खानपान से लेकर इलाज व अन्य हर तरह का खर्च संस्था उठाती है। अभी तक 12 मरीज वैली कला में ट्रेंड होकर अपने घर जा चुके हैं। कई सेवारत व मौजूदा डॉक्टर भी स्वेच्छा से यहां आकर इन मरीजों का इलाज निःशुल्क करके संस्था को सहयोग करते हैं।
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ट्रस्ट के निःशुल्क प्रकल्प

- समाजसेवियों की ये टोली हर साल अप्रैल माह में ‘फीस का लंगर’ लगाती है। शिक्षकों की संस्तुति के बाद कई गरीब छात्रों की वार्षिक फीस भी संस्था की ओर से दी जा रही है।
- पंजाब के विभिन्न शहरों में 4 बेहद गरीब लोगों को 6.50 लाख की लागत से वन रूम सेट बनवाकर दिए गए हैं।
- किडनी ट्रांसप्लांट के 4, आंखों के 16, स्कल प्लेट्स के 3 समेत अन्य 20 ऑपरेशन निःशुल्क करवाए गए हैं।
- वर्ष 2016 से अभी तक 50 मरीजों की डायलिसिस करवाई जा चुकी है।
- हर साल नवंबर-दिसंबर-जनवरी में सर्दी की यूनिफॉर्म व जूतों का लंगर लगाया जाता है, जिसमें करीब 2 से 2.50 लाख का खर्च आता है।
- विभिन्न शहरों में 90 विधवाओं को त्रैमासिक राशन वितरित किया जाता है। एक महिला को 3400 रुपये का राशन दिया जाता है।
- अति गरीब लोगों के घरों में 14 शौचालय बनाकर दिए जा चुके हैं।
- 29 गरीब लड़कियों की शादी करवाई जा चुकी है। हर शादी में 50 हजार खर्च किए जाते हैं।
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