चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों के बच्चे पढ़ाई करने के साथ-साथ अब फल और सब्जी उगाना भी सीखेंगे। इसके लिए हर स्कूल में किचन गार्डन बनाए जाएंगे। स्कूलों के बाग में जो सब्जी उगेगी, उसे मिड-डे मील के लिए किचन में पकाया जाएगा और स्टूडेंट्स को ही खाने को दिया जाएगा। इसके लिए एजुकेशन सेक्रेटरी ने आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।
सभी प्रिंसिपल व स्कूल हेड को स्कूल परिसर में जगह उपलब्ध कराकर सब्जियां उगाने को कहा गया है। स्कूल प्रबंधन की ओर से कुछ जगह निर्धारित करके मूली, मिर्च, मेथी, सेम, टमाटर समेत अन्य सब्जियां उगाई जाएंगी, ताकि स्टूडेंट्स को पौष्टिक सब्जियां खाने को मिल सकें। यह योजना उन्हीं स्कूलों में शुरू की जाएगी, जिनके पास भूमि उपलब्ध होगी। इस संबंध में उत्तराखंड और हिमाचल के स्कूलों से सीख ली गई है।
शुरुआती दौर में ‘किचन गार्डन’ योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा। स्कूलों में किचन गार्डन योजना के माध्यम से बच्चों को पौधों के संबंध में जानने का मौका भी मिलेगा। अभी यह योजना उन्हीं स्कूलों में शुरू की जाएगी, जिनके पास भूमि उपलब्ध होगी। इसके बाद जिन स्कूलों के पास खाली भूमि है, वहां भी सब्जियां उगाई जाएंगी। स्कूलों में किचन गार्डन योजना के तहत बच्चों को सब्जियां व फल उगाने के प्रति जागरूक किया जाएगा।
मौसम के अनुसार उगाई जाएंगी सब्जियां
मौसम के अनुसार सब्जियों का चक्र तैयार किया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। यहां लगाए गए धनिया, मेथी व मिर्च का उपयोग मिड-डे मील में किया जाएगा। ऐसा सिस्टम तैयार किया जाएगा कि एक सब्जी का सीजन खत्म होने के बाद दूसरी तैयार हो जाए। स्कूल परिसर के अंदर या बाहर अनुपयोगी जमीन का इस्तेमाल किचन गार्डन में किया जाएगा।
किचन गार्डन योजना से यह होगा लाभ
इस योजना से शिक्षा विभाग को मिड-डे मील के लिए मंडी से सब्जियां नहीं लानी पड़ेंगी। किचन गार्डन की सब्जियों की गुणवत्ता भी बाहर की सब्जियों से कहीं ज्यादा होगी। आजकल सब्जियों और फलों पर अत्यधिक कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव होता है। किचन गार्डन की सब्जियों में ऐसा नहीं होगा।
स्कूलों में किचन गार्डन की सुविधा होने से स्टूडेंट्स को शिक्षा के साथ कृषि संबंधी ज्ञान भी मिलेगा। इन किचन गार्डन में सब्जियों और फलों में बीमारियों की पहचान, मौसम की मार, खाद तथा उर्वरक का प्रयोग, समयानुसार सिंचाई सहित उनकी देखभाल आदि की जानकारी स्टूडेंट्स टीचर से ले सकेंगे।
अभी मिल रहा चावल, दाल, चपाती व सब्जी
अभी सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब 45 हजार स्टूडेंट्स को मिड-डे मील में दोपहर का भोजन दिया जाता है। इनमें से 27 हजार स्टूडेंट्स प्राइमरी, जबकि 18 हजार स्टूडेंट्स अपर प्राइमरी के हैं। स्कूलों ने दिन के हिसाब से अलग-अलग मेन्यू बनाया हुआ है। आमतौर पर दाल-चावल, चना-चावल, चपाती-सब्जी इत्यादि दी जाती हैं।
सेक्टर-42 स्थित डॉ. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एआईएचएम), चंडीगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (सीआईएचएम) और सेक्टर -17 स्थित होटल शिवालिक व्यू (सिटको) में स्कूलों में मिलने वाला मिड-डे मील खाना तैयार किया जाता है।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सिटको प्राइमरी के एक स्टूडेंट के लिए 7.20 पैसे, जबकि अपर प्राइमरी के लिए 9.17 पैसे चार्ज करता है। वहीं, एआईएचएम प्राइमरी और अपर प्राइमरी के एक स्टूडेंट के लिए 8.94 पैसे लेता है। सीआईएचएम प्राइमरी के एक स्टूडेंट के लिए 7.81 पैसे, जबकि अपर प्राइमरी के लिए 9.98 पैसे चार्ज करता है।
जिन स्कूलों में जगह उपलब्ध होगी, वहां किचन गार्डन बनाने के लिए कहा गया है। आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि, अभी इस व्यवस्था के शुरू होने में थोड़ा समय लगेगा। स्कूल में उगाई गई सब्जियों को मिड-डे मील के लिए किचन को दिया जाएगा।
- बीएल शर्मा, एजुकेशन सेक्रेटरी, चंडीगढ़ (यूटी)