पंजाब में चुनाव प्रचार थमने के बाद समाज के प्रति चिंतित रहने वाले लोग राजनेताओं के रवैये से आहत और निराश हैं। चार फरवरी को मतदान होगा लेकिन पिछले एक माह में जिस प्रकार सियासी दलों द्वारा एक दूसरे पर कीचड़ उछाला गया है, उसमें गंभीर मुद्दे दबकर रह गए।
इससे विभिन्न संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। कुछ दलों ने गंभीर मुद्दों को चुटकुलों तक सीमित कर दिया तो कुछ ने तवज्जो ही नहीं दी।
लंबे समय से किसान और मजदूर वर्ग के हितों के लिए संघर्ष कर रही भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि कर्ज के कारण पंजाब का किसान और मजदूर आत्महत्या कर रहा है।
किसी भी दल ने गंभीरता से इस मसले का समाधान जनता के समक्ष नहीं रखा। चिट फंड कंपनियों ने मालवा इलाके को बर्बाद कर दिया है लेकिन इस मुद्दे पर भी हवाई वायदे हुए।