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Kargil Vijay Diwas: चंडीगढ़ में बना वायुसेना विरासत केंद्र, यहां दिखता है कारगिल युद्ध के वीरों का शौर्य

Wed, 26 Jul 2023 12:33 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

यह अद्भुत पहल भारतीय वायुसेना की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने में मदद करेगी और युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करती है। यह विभिन्न युद्धों में वायुसेना की भूमिका को दर्शाता है, जिसमें 1965 और 1971 और कारगिल युद्ध, और बालाकोट हवाई हमले को भित्ति चित्र और यादगार के माध्यम से दर्शाया गया है।
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वायुसेना विरासत केंद्र। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कारगिल विजय दिवस के 24 साल पूरे होने पर आज पूरा देश भारत मां के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को याद कर रहा है। तीन मई 1999 को शुरू हुआ करगिल युद्ध 26 जुलाई 1999 तक चला था। भारतीय सेना ने अदम्य साहस दिखाते हुए दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया था। इस युद्ध से जुड़ी कुछ यादें चंडीगढ़ वायुसेना विरासत केंद्र में सहेज कर रखी गईं हैं। इनमें भारतीय वायुसेना द्वारा इस्तेमाल किए गए मिग-21, 23 और सुखोई जैसे लड़ाकू विमान, दुश्मन के ठिकानों को बमबारी के जरिए तहस-नहस करने वाले बिना लेजर गाइडेड बम शामिल हैं।

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विरासत केंद्र में कारगिल युद्ध के दौरान मिग और सुखोई जैसे विमानों की बंदूकों में जमीन और हवा में 200 मीटर दूरी तक टारगेट को नेस्तानाबूत करने वाले कारतूस भी देखे जा सकते हैं, जिनका वजन 840 ग्राम तक है। साथ ही यहां पर थिएटर शो में कारगिल से लेकर बालाकोट एयर स्ट्राइक के चलचित्र दिखाए जाते हैं, जो भारतीय वायुसेना के अदम्य साहस को बयां करते हुए पूरे देश को गौरवान्वित करते हैं। विरासत केंद्र में मौजूद सिमुलेटर के जरिए भले ही कुछ पल के लिए लेकिन आप भी युद्ध के दौरान के लम्हों को महसूस कर सकते हैं।

विरासत केंद्र में विंटेज विमान भी मौजूद

इस केंद्र में विंटेज विमान भी रखे गए हैं। यह अद्भुत पहल भारतीय वायुसेना की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने में मदद करेगी और युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करती है। यह विभिन्न युद्धों में वायुसेना की भूमिका को दर्शाता है, जिसमें 1965 और 1971 और कारगिल युद्ध, और बालाकोट हवाई हमले को भित्ति चित्र और यादगार के माध्यम से दर्शाया गया है। विरासत केंद्र में दर्शकों के लिए आकर्षण की कई चीजें हैं जैसे कि विमान के मॉडल, एयरो इंजन और हथियार, जिसमें ग्रेयाजेव-शिपुनोव ट्विन बैरल गन भी शामिल हैं।

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- फोटो : अमर उजाला

विरासत केंद्र में और क्या है खास

  • केंद्र में फ्लाइंग सिम्युलेटर भी हैं जो आगंतुकों को उड़ान का अनुभव प्रदान करता है।
  • केंद्र के आकर्षणों में पांच पुराने विमान और एसएएस-III पिकोरा मिसाइल भी शामिल है।
  • केंद्र में एक हिंदुस्तान पिस्टन ट्रेनर-32 प्राथमिक उड़ान प्रशिक्षण विमान प्रदर्शित किया गया है। भारतीय वायुसेना में इसके संचालन की अवधि 1977 से 2009 तक थी।
  • सेंटर में एक मिग-21 सिंगल सीट फाइटर को भी तैनात किया गया है।
  • हेरिटेज सेंटर में एक विंटेज प्रोटोटाइप विमान कानपुर-1 भी शामिल है। यह दुर्लभ एकल इंजन वाली मशीन 1958 में स्वर्गीय एयर वाइस मार्शल हरजिंदर सिंह वीएसएम 1, एमबीई द्वारा डिजाइन और निर्मित की गई थी और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पीईसी) चंडीगढ़ के पास था।
  • एक जीएनएटी विमान (सेब्रे स्लेयर) 1971 प्रसिद्धि भी प्रदर्शन पर है।
  • यह हेरिटेज सेंटर केंद्र संवर्धित वास्तविकता, होलोग्राम, वर्चुअल रियलिटी और इलेक्ट्रो मैकेनिकल बाड़ों, भारतीय वायुसेना के विभिन्न पहलुओं को उजागर करने वाले इंटरेक्टिव कियोस्क को भी प्रदर्शित करने के लिए रखा गया है। 
  • विरासत केंद्र भारतीय वायुसेना के विभिन्न युद्ध अभियानों को चित्रित करने वाले भित्ति चित्रों की मदद से भारतीय वायु सेना के गौरवशाली इतिहास को प्रदर्शित करता है, जो 1948 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय वायु सेना की भूमिका से शुरू होकर भारतीय वायु सेना के नवीनतम संचालनों जैसे बालाकोट वायु सेना के इलेक्ट्रो मैकेनिकल 3डी-डायरामास स्ट्राइक को दर्शाता है।
  • एक ऑडियो-विजुअल गैलरी समय के माध्यम से भारतीय वायुसेना की यात्रा को प्रस्तुत करती है, जो इसके उद्भव से लेकर आधुनिक समय तक के इसके विकास के साथ-साथ भारतीय वायुसेना के सफर को बयां करती है।
  • भारतीय वायुसेना रैंकों और बैज के लिए एक एनक्लोजर तैयार किया गया है। इसके अलावा एक खंड है, जहां भारतीय वायुसेना की वर्दी दिखाई गई है। वहीं दीवारों के एक भाग पर भारतीय वायुसेना के कई बचाव कार्यों को भी प्रदर्शित किया गया है। 
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