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Haryana News: यौन शोषण के आरोपी प्रिंसिपल को बचाने के मामले की जांच न्यायाधीश से कराने के अनुरोध पर हंगामा

Mon, 18 Dec 2023 11:14 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

गृहमंत्री अनिल विज ने सदन में बताया कि खिलाड़ियों के खिलाफ शोषण के 24 केस आए हैं। इनमें से 17 केस कोर्ट में चल रहे हैं। छह केसों में जांच के दौरान कोई साक्ष्य नहीं मिला। चार केस में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुआ। संदीप सिंह का केस चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन है।
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हरियाणा विधानसभा सत्र। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जींद के स्कूल में छात्राओं के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार प्रिंसिपल के मुद्दे पर हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सोमवार को भी जबरदस्त हंगामा हुआ। विपक्ष ने आरोपों की जांच उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कराने के अनुरोध का विरोध जताया। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही को उच्च न्यायालय के अधीन नहीं किया जाना चाहिए। आज तक के रिकॉर्ड में यह कभी नहीं हुआ कि विधानसभा के मामले की जांच उच्च न्यायालय के न्यायाधीश करें। इस पर विधानसभा के अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि यह उनका फैसला नहीं था।

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सदन की सर्वसम्मति के बाद ही यह फैसला किया गया था। 15 मिनट के लिए सदन भी स्थगित हुआ। बाद में विधायक बीबी बतरा ने नियम पढ़कर बताए कि विधानसभा मामले की जांच न्यायाधीश को देना ठीक नहीं है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मंगलवार को सत्र से पहले या सत्र के बाद कार्य सलाहकार समिति की बैठक बुला लेते हैं। इसमें तय किया जाएगा कि जांच किससे करवाई जाए। सरकार ने इसमें कानूनी राय भी मांगी है। मंगलवार को कानून विशेषज्ञों की रिपोर्ट भी आ जाएगी। इस बीच, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और गीता भुक्कल के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई।

कांग्रेस सदस्यों ने दुष्यंत चौटाला के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी दिया है। शुक्रवार को आरोपी प्रिंसिपल को लेकर दुष्यंत चौटाला और गीता भुक्कल ने एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए थे। इस मामले में सदन ने तय किया था कि इसकी जांच के लिए हाईकोर्ट के जज से सिफारिश करेंगे।

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सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के बाद जैसे ही शून्यकाल की कार्रवाई शुरू हुई तो नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुडडा खड़े हो गए और मांग की कि विधानसभा अध्यक्ष उन संदर्भों की शर्तों को स्पष्ट करें, जिनके आधार पर जांच की जाएगी। इस पर सदन के नेता व सीएम मनोहर लाल ने कहा कि उन्होंने गृह विभाग को बोल दिया है कि वह उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अनुरोध करेगा कि सदन में लगाए आरोपों की जांच के लिए उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को नियुक्त किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार संदर्भ की शर्तों में विपक्ष के किसी भी सुझाव को शामिल करने के लिए तैयार है। इस पर हुड्डा व अन्य कांग्रेस विधायकों ने इसका विरोध जताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में किसी भी मामले की जांच अध्यक्ष या मुख्यमंत्री या सदन द्वारा गठित समिति कर सकती है। इस पर स्पीकर ने दोहराया कि यह फैसला सदन ने लिया था।

जज के हाथ में अपनी पोथी नहीं देनी चाहिए: गौतम

बहस के दौरान जजपा विधायक राम कुमार गौतम ने विपक्ष का समर्थन करते हुए मामले की जांच उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश से कराने के सदन के फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जज के हाथ में अपनी पोथी देनी ठीक नहीं है। यह हाउस का अपमान है। सदन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। इस मामले में सर्वदलीय कमेटी बनाकर इसकी जांच करवा लेनी चाहिए।
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विधानसभा का मामला विधानसभा में सुलझाया जाए: बतरा

बहस के दौरान रोहतक से कांग्रेस विधायक बीबी बतरा ने कहा कि उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि विधानसभा का मामला विधानसभा में हल किया जाए। मौजूदा न्यायाधीश से जांच करवाने का अनुरोध सदन के नेता ने तय किया है।

दुष्यंत ने सदन में झूठा बयान दिया, मैं सदन को तथ्य दे रही हूं: गीता भुक्कल

बहस के दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने कहा कि उपमुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कहा था कि 2005 और 2011 में स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ भी यौन शोषण के मामले आए थे। जबकि प्रिंसिपल 2005 में नौकरी में नहीं आया था। वहीं, यह भी आरोप लगाया गया था कि 2011 में प्रिंसिपल को बचाने के लिए झज्जर स्थित मेरे घर पर बैठक हुई थी, जबकि 2011 में झज्जर में मेरा घर ही नहीं बना था।

इस पर चौटाला ने कहा कि वह अपनी दलील में संशोधन करना चाहते हैं कि मीटिंग 2012 में हुई थी। भुक्कल ने यह भी कहा कि वहां के सरपंच ने मना कर दिया है कि ऐसी कोई पंचायत नहीं हुई है। सरपंच ने एक अखबार में बयान दिया है कि जजपा के लोग उसके घर आए थे वह उन पर दबाव डाल रहे हैं। वहीं, दुष्यंत ने कहा कि जांच में सब सामने आ जाएगा। जांच से मत भागिए।
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