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सीटें रह गई खालीं.. पीयू के हिंदी, संस्कृत और उर्दू विभागों को दाखिले के लिए ढूंढे से नहीं मिले पात्र विद्यार्थी

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी का नाम तो दूर-दूर तक प्रसिद्ध है, लेकिन इसके कई विभागों का बुरा हाल है। इन विभागों तक विद्यार्थी दाखिले के लिए नहीं पहुंच रहे। कुछ आ भी रहे हैं तो वह अपात्र हैं। हिंदी, संस्कृत, परशियन व उर्दू विभाग में 50 फीसदी सीटें खाली हैं। विभागों को ढूंढे से विद्यार्थी नहीं मिले। अब कोशिश की जा रही है कि कुछ सीटें किसी न किसी तरह भरी जाएं, लेकिन उसके लिए उच्चाधिकारियों की अनुमति लेनी होगी। विभागों ने कम विद्यार्थी पहुंचने का कारण कोरोना व देरी से रिजल्ट जारी होने को माना है।
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एमए हिंदी की 60 में से 45 सीटें ही भरीं
आंकड़ों पर गौर करें तो पीयू के हिंदी विभाग में एमए में 68 सीटें हैं। दाखिले के लिए 116 विद्यार्थियों ने आवेदन किए। इसमें 70 पात्र निकले, लेकिन एडमिशन 45 ने ही लिया। अनुवाद डिप्लोमा में भी 68 सीटें हैं। विभाग को आवेदन 43 मिले, लेकिन दाखिला 19 ही विद्यार्थियों ने लिया। यहां भी सीटें काफी संख्या में खाली रह गईं। विभाग ने नियमों का पालन करते हुए दाखिले दिए, लेकिन यदि नियमों का लचीला बनाया जाता तो शायद सीटें भर सकती थीं। विभागाध्यक्ष प्रो. बैजनाथ कहते हैं कि जितने पात्र विद्यार्थी मिले उनके दाखिले किए गए हैं। सीटें पूरी न भरने का एक कारण कोरोना भी रहा है। इसी तरह संस्कृत विभाग से एमए की 60 सीटों में से 60 फीसदी ही भर पाई हैं। हालांकि कुछ ग्रोथ जरूर हुई है, लेकिन एडमिशन का आंकड़ा बेहतर नहीं रहा है।
एमए उर्दू के लिए आवेदन अधिक आए पर दाखिले 14 ही हो पाए
इसी तरह उर्दू विभाग की एमए की 34 सीटों के लिए 80 से अधिक आवेदन पहुंचे, लेकिन एडमिशन 14 ही विद्यार्थियों ने लिए। सर्टिफिकेट इन उर्दू की 85 सीटों में से 27, डिप्लोमा इन उर्दू में 29 सीटों में से दस, एडवांस उर्दू डिप्लोमा की 17 सीटों में से 14 विद्यार्थियों ने एडमिशन लिए। इसी तरह सर्टिफिकेट कोर्स इन परशियन की 29 सीटों में से सात सीटें भरी हैं। इसी भाषा के डिप्लोमा के लिए 17 सीटें हैं। इनमें भी पांच ही सीटें भरी हैं। एडवांस डिप्लोमा इन परशियन की 11 में से तीन सीटें भरी हैं। एमए परशियन प्राइवेट कोर्स के लिए महज एक ही विद्यार्थी पहुंचा है। विभागाध्यक्ष डॉ. अली अब्बास कहते हैं कि बीए का रिजल्ट इस बार लेट मिला है। साथ ही जम्मू के विद्यार्थी उर्दू कोर्स में अधिक पहुंचते हैं, लेकिन वहां भी बीए का रिजल्ट बहुत लेट आया। इस कारण सीटें खाली रही हैं। अन्य भाषा कोर्स जैसे जैपनीज, रशियन, चाइनीज आदि में भी दाखिलों की अच्छी स्थिति नहीं बताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि इन विभागों को अपनी योजना में बदलाव करना होगा या फिर रोजगार के लिए नए रास्ते खोलने होंगे। तभी विद्यार्थी इस ओर आकर्षित होंगे।
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इनसेट--
जानकार बोले- इस तरह भर सकती हैं सीटें
पीयू के जानकारों का कहना है कि विभागों में दाखिले पूरे करने के लिए नियमों को लचीला करना होगा। यह नहीं है कि इन विभागों में दाखिले के लिए विद्यार्थी नहीं आ रहे, वह आवेदन कर रहे हैं, लेकिन विभाग उन्हें दाखिले के लिए पात्र नहीं समझ रहे। इसके लिए नियमों का सरलीकरण करना होगा। यदि किसी विद्यार्थी ने साइंस से पढ़ाई की है, लेकिन वह स्नातक हिंदी, संस्कृत आदि विषयों से करना चाहता है तो उसे यह मौका दिया जाना चाहिए। इसमें नियम आड़े नहीं लगाने चाहिए। पीयू चाहे तो इन विभागों में आए अन्य आवेदनों पर विचार करे और बचे विद्यार्थियों को दाखिले दे। इससे पीयू की सीटें भी भरेंगी और विद्यार्थियों की रुचि भी पूरी होगी।
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