सतलोक आश्रम के संत रामपाल को भगवान मानने वाले उनके समर्थक ही आज उनको जमकर कोस रहे हैं। उन्होंने कहा कि कम से कम दस लोग मारे गए हैं। आश्रम में ऐसे बहुत से लोग थे, जो पहली बार यहां आए थे। उन्होंने कहा कि वे आज के बाद किसी बाबा के चक्कर में नहीं पड़ेंगे।
कोई बाबा के चमत्कार से अपनी बूढ़ी मां का इलाज कराने आया था तो कोई अपने विकलांग बेटे को ठीक कराने आया था। रामपाल के समर्थकों ने बताया कि बाबा के कमांडर उनको जाने नहीं दे रहे थे। किसी ने अपनी पत्नी को तो किसी ने अपनी बेटे को वहां से मौका मिलते ही भगा दिया।
यूपी के ही रहने वाले धर्म सिंह ने बताया कि पुलिस ने जब मंगलवार को आश्रम पर हमला किया तो वह बिल्कुल डर गए थे। पुलिस द्वारा छोड़े गई आंसू गैस के धुएं से उनकी आंखों में जलन होने लगी। कई लोग तो आंसू गैस के धुएं के कारण बेहोश हो गए थे। उन्होंने बताया कि आज के बाद कभी किसी बाबा के पास नहीं जाएंगे।
रेलवे स्टेशन पर ढूंढते रहे परिजनों को, नहीं मिले
कई दिन आश्रम में रहने के बाद बाहर आए अनुयायियों के परिजन और बच्चे उनसे बिछड़ गए हैं। अमर उजाला टीम ने रेलवे स्टेशन पर अपने परिजनों से बिछड़े बच्चों से उनका हाल जाना।
एक बच्चे ने कहा, मैं अपने मम्मी-पापा और 5 साल के भाई के साथ तीन नवंबर को आश्रम आया था। कुछ दिन बाद जब हमने वापस जाने की बात कही, तो हमें बाहर नहीं जाने दिया। मंगलवार रात को कुछ लोगों के साथ मैं आश्रम से भाग निकला।
मगर मेरे मम्मी-पापा और भाई आश्रम में ही रह गए। यह कहना 10 वर्षीय यूपी के रहने वाले अनुज का। अनुज अपने अभिभावकों से बिछड़ने के बाद रेलवे स्टेशन पहुंचा। अनुज ने बताया कि पुलिस वालों ने फोन पर मेरे पापा से भी बात कराई है।
बाहर नहीं आने दिया, न खाना था, न पानी
झारखंड के लक्ष्मण, जगन्नाथ, नंदमनी और यूपी के मोहन प्रसाद ने बताया कि आश्रम में रूखा-सूखा खाना था। बाहर नहीं आने दे रहे थे। उन्होंने घर से आते समय रेलवे का रिजर्वेशन भी करवाया हुआ था, लेकिन उनको बाहर नहीं आने दिया गया। वह किसी तरह उनके आगे गिड़गिड़ाकर आश्रम से बाहर आए हैं। आश्रम में कोई व्यवस्था नहीं थी, पीने को पानी नहीं था और खाने को भोजन नहीं।
बीवी गुम हो गई है
यूपी के इटावा के रहने वाले संजीव कुमार ने बताया कि आश्रम में दो दिनों से उसकी बीवी का कुछ अता-पता नहीं है। दो दिन पहले तक तो उसकी बीवी आश्रम के बाहर महिलाओं के बीच बैठी हुई थी, लेकिन दो दिन से उसकी पत्नी का कुछ अता-पता नहीं है। आश्रम से बाहर भागकर बीवी को ढूंढता हुआ रेलवे स्टेशन पर आया हूं। जब तक वह नहीं मिल जाती, मैं यहीं पर रहूंगा।
पापा को पुलिस ने पकड़ लिया
छत्तीसगढ़ निवासी 12 वर्षीय विकल्प के मुताबिक वह दो नवंबर को अपने पापा, दादी और बहन के साथ आश्रम आया था। बुधवार सुबह हम किसी तरह से आश्रम से बाहर निकले, तो पुलिस वालों ने मेरे पापा को पकड़ लिया और हमें बस में बैठा दिया। अब मेरे पास पैसे भी नही हैं। हम कैसे घर जाएं। मेरे दादी की तबीयत खराब थी, तो एक व्यक्ति ने उन्हें दवा दिला दी।
लड़के का इलाज कराने आया था
दिल्ली के शास्त्री नगर निवासी सुरेश शर्मा ने बताया कि मेरे बेटा नि:शक्त है। मेरे ही एक पड़ोसी ने बताया था कि बाबा के झाड़े से मेरा बेटा ठीक हो जाएगा। मैं पहली दफा ही आश्रम आया था। बुधवार को आश्रम से निकलते समय मैं मेरी बीबी और बच्चे से अलग हो गया। घर पर फोन किया, तो पता चला कि पत्नी घर पहुंच चुकी है। मगर मेरे लड़के का अभी तक कोई पता नहीं चला है। हालांकि पुलिस ने मेरा फोन नंबर नोट कर लिया था।