इस बार की महाशिवरात्रि श्रवण व धनिष्ठा नक्षत्र से व्याप्त रहेगी। महाशिवरात्रि के साथ शुक्र प्रदोष व्रत का अद्भुत संयोग बन रहा है। प्रदोष व्रत के अलावा इस दिन कई और भी दुर्लभ योग बन रहे हैं। इस दिन शिव योग, सिद्ध योग और चतुर्ग्रही योग का भी संयोग बन रहा है।
चंडीगढ़ सेक्टर 28 के खेड़ा शिव मंदिर के पुजारी पंडित ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि इस बार की महाशिवरात्रि विशेष फलदायी रहेगी। जो भी भक्त व्रत रखकर पूजा-पाठ करेंगे, भोलेनाथ उनकी सारी मनोकामनाएं जल्द पूरी करेंगे।
अष्टम मुहूर्त में होती है महाशिवरात्रि की पूजा : बीरेंद्र नारायण मिश्र
सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख और कर्मकांडी पडित बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि महाशिवरात्रि 8 मार्च दिन शुक्रवार को है। यह पर्व रात्रि के अष्टम मुहूर्त में यदि चतुर्दशी आ जाए तो महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। आठ मार्च को त्र्योदशी रात नौ बजकर 54 मिनट तक है। अष्टम मुहूर्त शुक्रवार की रात्रि को रात 11 बजकर 45 मिनट पर आ रहा है। इसलिए महाशिवरात्रि 8 मार्च को मनाया जाएगा। नौ मार्च शनिवार को चतुर्दशी शाम 6 बजकर 14 मिनट तक है। इसलिए महाशिवरात्रि 8 मार्च को बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के दिन सवार्थ सिद्धि योग के साथ साथ प्रदोष काल शुक्रवार को है। यह उत्तम योग माना गया है। शिवरात्रि के दिन तंत्रमंत्र की पूजा होती है।
महाशिवरात्रि के व्रत के साथ रात्रि में करें चार प्रहर की पूजा: डॉ लाल बहादुर दुबे
श्री देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष डॉ लाल बहादुर दुबे ने बताया कि महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले श्रद्धालु रात्रि में चार प्रहर की पूजा करके शिवजी को प्रसन्न करते हैं। पूजा में दूध, दही, शहद, घी, शक्कर,गंगाजल, गन्ने का रस आदि से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। भांग, धतूरा, बेलपत्र, फूल, फल, नैवेद्य आदि उपचारों से तथा धूप दीप इत्यादि से भगवान की पूजा की जाती है। इसके बाद आरती, शिव चालीसा, शिव सहस्त्रनाम आदि से भगवान शिव की स्तुति की जाती है। जिससे भगवान महादेव प्रसन्न होकर विद्या, धन, संतान, सौभाग्य, सुख, समृद्धि, आरोग्यता आदि प्रदान करते हैं।
अश्वमेध यज्ञ के बराबर मिलता है फल: पंडित बृज किशोर पांडेय
सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित बृज किशोर पांडय ने कहा कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा करने से अश्वमेघ यज्ञ के बराबर फल मिलता है। उन्होंने कहा कि इस दिन शिवकथा श्रवण करने और शिव चालीसा का पाठ करने से उत्तम फल मिलता है।
इस रंग की वस्तु करें दान...
राशि रंग की वस्तु
मेष लाल
वृष सफेद
मिथुन हरा
कर्क सफेद
सिंह लाल
कन्या हरा
तुला सफेद
वृश्चिक लाल
धनु पीला
मकर काला
कुंभ काला
मीन पीला
चार प्रहर की पूजा ...
पहली पूजा शाम 6.22 बजे से रात 9.27 बजे तक
दूसरी पूजा रात 9.28 बजे से रात 12.31 बजे तक
तीसरी पूजा रात 12.32 बजे से सुबह 3. 35 बजे
चौथी पूजा सुबह 3.35 बजे से सुबह 6.40 बजे तक।