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Chandigarh News: हरियाणा में सरपंच एसोसिएशन हुई दो फाड़, विकासशील संगठन आया सामने

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पहली वाली एसोसिएशन पर लगाया कांग्रेस के एजेंट होेने का आरोप, 11 सूत्रीय मांगें सरकार को भेजी
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चंडीगढ़। हरियाणा में ई-टेंडरिंग के विरोध में खड़ी हुई सरपंच एसोसिएशन दोफाड़ हो गई है। अब नया संगठन हरियाणा विकासशील सरपंच एसोसिएशन के रूप में सामने आया है। नई यूनियन के राज्य प्रधान नरेंद्र कादियान और राज्य उप प्रधान व राज्य प्रवक्ता की जिम्मेदारी चौधरी रफीक हथोड़ी को दी गई है। नई एसोसिएशन का दावा है कि 25 सदस्यीय कार्यकारिणी में से 14 सदस्य उनके साथ हैं, जबकि पहले वाली एसोसिएशन कांग्रेस पार्टी के एजेंट के तौर पर काम कर रही है।
यहां चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने यह जानकारी दी। एसोसिएशन ने चेताया कि वह सरकार को 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन देंगे, अगर सरकार ने उनकी मांगों पर गौर नहीं किया तो वह आंदोलन शुरू करेंगे और 2024 के चुनावों में सरकार को इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
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हथोड़ी ने आरोप लगाया कि पहले बनाई गई सरपंच एसोसिएशन विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर अपने गांवों की जरूरतों और चिंताओं की वकालत नहीं कर पा रहा था। पहले वाले प्रधान समेत अन्य पदाधिकारियों ने राजनीति में भाग लेना शुरू कर दिया है, इसलिए वे सरपंचों की लड़ाई न लड़कर कांग्रेस पार्टी के साथ गए हैं। हरियाणा विकासशील सरपंच एसोसिएशन ने कहा कि हमारा एक अराजनीतिक एसोसिएशन है और हमारा मुख्य एजेंडा 'सरपंचों' को अधिक शक्तियां दिलवाने के लिए लड़ना है। कार्यक्रम में जींद से अनिल लाठर, रोहतक से नरेश, भिवानी से कुलदीप, हिसार से आजाद, रेवाड़ी से सुखबीर, अंबाला से विक्रम, फतेहाबाद से सुखविंदर, पलवल से कालू, फरीदाबाद से निसार और करनाल से जोनी शर्मा भी मौजूद थे।

सरपंचों ने मांगी गांवों में तैनात कर्मियों की एसीआर की पावर
सरपंचों ने कहा कि संविधान के 73वें संशोधन, अनुसूची 11 के तहत सरपंचों को 29 अलग-अलग शक्तियां देता है, जिसे मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, केरल और गोवा जैसे राज्यों में लागू किया, लेकिन हरियाणा में नहीं। एसोसिएशन ने कहा कि वह गांव के विकास के लिए ई-टेंडरिंग प्रणाली का समर्थन करते हैं, लेकिन सरपंचों को 20 लाख रुपये तक के विकास कार्य कराने की पावर दी जाए। सरपंचों को गांवों के कार्यों को जमीनी स्तर पर लागू करने वाले सरकारी अधिकारियों की एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट ('एसीआर') लिखने का अधिकार भी दिया जाना चाहिए। जनरल सेक्रेटरी कमल काजल ने कहा कि एसोसिएशन मनरेगा की मजदूरी 300 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिदिन कराएगी। हरियाणा में अवैध रूप से कब्जाई गई पंचायत भूमि को मुक्त कराने भी काम किया जाएगा। विकास कार्यों के लिए सरकार से आने वाली 25 लाख रुपये तक की धनराशि सीधे पंचायत के खाते में भेजी जाए।
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टोहाना में पांच नवंबर को सरपंचों और पंचों की रैली होगी। उनका किसी दल से कोई संबंध नहीं है। हां, अगर कोई विपक्षी हमारी मांगों का समर्थन करता है तो उसका स्वागत है। न तो वे कांग्रेस के सदस्य हैं और न किसी नेता से उनका जुड़ाव है। वह केवल पंचायती राज संस्थाओं की मजबूती की लड़ाई लड़ रहे हैं। नई एसोसिएशन सरकार के लिए काम रही है और सरपंचों को कमजोर करने का काम कर रही है। रफीक न तो सरपंच है और न ही उसकी पत्नी सरपंच है, इसलिए उनको दो महीने से बैठकों में नहीं बुलाया जा रहा था।
- रणबीर सिंह, सरपंच एसोसिएशन हरियाणा, राज्य प्रधान
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