कड़ी प्र्रशासनिक पाबंदियों के बावजूद तलवंडी साबो में वीरवार को सरबत खालसा समागम के दौरान हजारों की संख्या में लोग पहुंचे, उन्होंने न सिर्फ बादल परिवार को सिख पंथ से निकालने का मत प्रवान किया, बल्कि सिखों के लिए अलग देश की भी मांग की।
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बीते साल सरबत खालसा के दौरान बनाए गए जत्थेदारों बलजीत सिंह दादूवाल, अमरीक सिंह अजनाला, ध्यान सिंह मंड के अलावा सिमरनजीत सिंह मान इस समागम में शामिल नहीं हो सके। क्योंकि हरियाणा के गांव सिंघपुरा से पंजाब में दाखिल होते समय पुलिस ने उन्हें समर्थकों समेत हिरासत में ले लिया था।
बुधवार को अखंड पाठ शुरू होने के बाद पंद्रह से बीस व्यक्ति ही समागम वाली जगह पर मौजूद थे। वहीं वीरवार सुबह घने कोहरे का फायदा उठाते हुए करीब चार सौ लोग समागम स्थल तक पहुंचने में सफल हो गए। जब पुलिस कर्मी अलाव सेक रहे थे तो सरबत खालसा में शामिल होने के चाहवान युवक पुलिस को चकमा देकर समागम स्थल में पहुंच गए।
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बादल परिवार को सिख पंथ से निकालने का मत प्रवान किया
Sarbat Khalsa 2016 at Talwandi sabo
वहीं पुलिस समागम में बड़ी तादाद में पहुंचे लोगों के आगे बेबस नजर आई। जैसे ही समागम में लोगों की भीड़ ज्यादा होने लगी तो आईजी से लेकर कई जिलों के एसएसपी बख्तरबंद गाड़ियों व आधुनिक हथियारों समेत पंजाब पुलिस के जवान यह यकीनी बनाने में लगे हुए थे कि किसी ने भी पुलिस की नाकाबंदी को नहीं तोड़ा।
तलवंडी साबो के साथ सटे गांव लेलेवाला की ओर से जैसे ही करीब 25 निहंग सिंहों का एक जत्था पंडाल की ओर बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पंडाल में बैठे लोगों को इस बारे में पता चलते ही वे सरकारी गाड़ियों के शीशे तोड़कर अपने साथियों को पुलिस हिरासत से छुड़वा ले गए। इसके बाद पुलिस का मनोबल इस तरह से टूटा कि उन्होंने समागम में आने वाले लोगों को नहीं रोका।
दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू कश्मीर और पंजाब के विभिन्न जिलों के लोग वाहनों को सड़कों पर रोक खेतों के रास्ते से पंडाल में पहुंचे। अकाली दल अमृतसर के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान के बेटे ईमान सिंह मान भी एक बडे़ काफिले समेत पंडाल के अंदर पहुंचने में कामयाब हो गए। ईमान सिंह, बूटा सिंह, सुरिंदर सिंह, बबलप्रीत सिंह, बगीचा सिंह, जसपाल सिंह, अमरजीत सिंह, जगदेव सिंह आदि ने अपने संबोधन के जरिये बादल परिवार पर निशाना साधा। उन्होंने प्रदेश सरकार को हर फ्रंट पर फेल बताया। स्थिति यह बनी हुई थी कि हर प्रवक्ता श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं से लेकर सरबत खालसा के आयोजन में विघ्न डालने के आरोप लगा बादल परिवार को पंजाब और पंथ का दुश्मन करार देते रहे।
जब यह सूचना मिली कि 2015 में हुए सरबत खालसा के दौरान बनाए गए जत्थेदार ध्यान सिंह मंड, अमरीक सिंह अजनाला और बलजीत सिंह दादूवाल समेत पुलिस ने सिमरनजीत सिंह मान और मोहकम सिंह को हरियाणा से पंजाब में दाखिल होने समय हिरासत में ले लिया तो समागम के मुख्य प्रबंधक जसकरण सिंह ने उस प्रस्ताव को पढ़कर सुनाया जो पहले सरबत खालसा के दौरान जत्थेदारों की ओर से जारी किया गया था।
इसमें बादल परिवार को पंथ से निकालने और सिखों के लिए अलग देश की मांग थी। इसके बाद लोगों की जमा भीड़ ने उक्त प्रस्ताव को प्रवानगी दी। समागम स्थल पर तैनात पुलिस को उस समय बड़ी परेशानी से गुजरना पड़ा जब वहां पहुंचे लोगों ने अलगाववादी नारे लगाने शुरू कर दिए।
सिख नेताओं को छुड़वाने के लिए लगाया जाम
पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए गए जत्थेदारों के अलावा सिमरनजीत सिंह मान, मोहकम सिंह को छुड़वाने के लिए सिख संगतों ने तलवंडी साबो के मेन खंडा चौक पर जाम लगा दिया। जहां पर लोगों ने उक्त नेताओं की रिहाई की मांग की। वहीं पुलिस ने गिरफ्तार सिख नेताओं को छोड़ना ही मुनासिब समझा। इसके बाद सिख संगतों ने जाम को हटा दिया।