पाक जेल में कैद पंजाब का व्यक्ति नानक सिंह
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लाहौर की जेल में सरबजीत सिंह के बाद संदिग्ध हालात में किरपाल सिंह की मौत ने एक अन्य भारतीय कैदी नानक सिंह के परिवार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नानक सिंह के परिवार से बातचीत करने के बाद शुक्रवार को इतिहासकार एवं शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ ने यह जानकारी पत्रकारों को दी। करीब 31 वर्ष पहले नानक सिंह सात साल की उम्र में भूल से सरहद पार करके पाकिस्तान पहुंच गया था। कोछड़ का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से नानक सिंह की रिहाई के लिए पहल न करने पर वह लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है।
कोछड़ के अनुसार वर्ष 1985 में भारत-पाकिस्तान सरहद से सटे दरिया रावी के पास बसे गांव बेदी छन्ना के रतन सिंह का सात वर्षीय पुत्र नानक सिंह भूल से सरहद पार कर पाकिस्तान पहुंच गया। रतन सिंह ने लापता बेटे की दरिया के आसपास जंगल में तलाश की। उसका कोई सुराग न लगने पर अगले दिन सुबह भारतीय पोस्ट वधाई चीमा में तैनात बीएसएफ के अधिकारियों से मिलकर उन्हें नानक की गुमशुदगी के बारे में जानकारी दी गई।
इस पर बीएसएफ ने पाकिस्तानी रेंजरों के साथ बैठक की। इसमें नानक सिंह के रास्ता भटक कर सरहद पार पाकिस्तान पहुंचने की बात रखी। इस पर पाकिस्तानी रेंजरों ने सरहद से सटे गांवों में नानक की गुमशुदगी की मुनादी करा दी। कोछड़ ने बताया कि नानक सिंह की गुमशुदगी के 14 वर्ष बाद वर्ष 1999 में पुलिस थाना रमदास से पुलिस वाले पाकिस्तान की जेलों में बंद 145 भारतीय कैदियों की सूची लेकर रतन सिंह के पास आए। कैदियों की सूची में 71 नंबर पर नानक सिंह का भी नाम दर्ज था।
सूची में भूलवश नानक की जगह कानक सिंह लिखा गया था, जबकि गांव का नाम बिल्कुल सही था। गांव के लोगों के समझाने पर पुलिस ने माना कि भारतीय विदेश मंत्रालय की मार्फत मिली सूची में गलती के चलते गांव बेदी छन्ना के नानक सिंह को ही कानक सिंह लिखा गया है। उन्होंने बताया कि इसके 17 वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक नानक सिंह की न तो पाकिस्तानी जेल से रिहाई हुई और न ही फिर से उसके संबंध में कोई समाचार ही नानक के परिवार के लोगों को मिल सका है।