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'रामपाल ड्रामेबाज, 21 को हाईकोर्ट में पेश करो'

Mon, 17 Nov 2014 07:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद हरियाणा पुलिस सोमवार को सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल को अदालत में पेश नहीं कर पाई। इससे नाराज हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि इस मामले में और सब्र नहीं होगा। डीजीपी 21 नवंबर तक रामपाल को पेश कोर्ट में पेश करें।
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इससे पहले एमिकस क्यूरी अनुपम गुप्ता ने बेंच से आग्रह किया कि डीजीपी और गृह सचिव को वारंट लागू नहीं करवाने के लिए अवमानना नोटिस जारी किया जाए। गुप्ता ने बेंच को बताया कि शनिवार शाम को सतलोक आश्रम, बरवाला से पुलिस फोर्स हटा ली गई, जिससे साफ पता चलता है कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने में डीजीपी और गृह सचिव नाकाम रहे हैं।

प्रदेश में संवैधानिक प्रणाली चरमराई

एमिकस क्यूरी ने बेंच से यह भी कहा कि यदि गिरफ्तारी के  लिए मांगे समय में रामपाल को पेश नहीं किया जाता तो मुख्यमंत्री को भी अवमानना नोटिस जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने दलील दी गई कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं कराने से स्पष्ट होता है कि प्रदेश में संवैधानिक प्रणाली चरमरा गई है।

उन्होंने मुख्यमंत्री को अवमानना नोटिस की मांग के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट की ओर से अयोध्या में नए निर्माण नहीं होने देने के आदेश का हवाला दिया। गुप्ता ने कहा कि यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू कराने में विफल रहे थे और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सजा भी सुनाई थी।

खून खराबे से बचने के लिए गिरफ्तारी नहीं

सोमवार को हरियाणा के एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन ने सुनवाई शुरू होते ही डीजीपी एसएन वशिष्ठ का शपथ पत्र पेश किया। इसमें कहा गया कि रामपाल की गिरफ्तारी के लिए पूरा लाव लश्कर लगाया गया था, लेकिन डेरे के बाहर महिलाएं और बच्चे बैठे थे। समर्थक पेट्रोल बम व अन्य घातक हथियारों से लैस हैं। लिहाजा खून खराबे से बचने के लिए गिरफ्तारी नहीं की जा सकी।

शपथ पत्र में अदालत से और समय की मांग भी की गई। सरकार के जवाब और एमिकस क्यूरी की दलील के बाद जस्टिस एम जियापॉल व जस्टिस दर्शन सिंह की डिवीजन बेंच ने फैसला दोपहर तक सुरक्षित रख लिया।

रामपाल के खिलाफ नया वारंट जारी

हाईकोर्ट की बेंच सोमवार को दोपहर साढे़ तीन बजे फैसला सुनाने बैठी तो एमिकस क्यूरी गुप्ता ने नया तथ्य पेश किया कि सोमवार को साढे़ बारह बजे डेरे के मीडिया कोआर्डिनेटर बलवान सिंह व राज कपूर ने बरवाला में डेरे के बाहर मीडिया को संबोधित किया था। उसमें कहा गया कि रामपाल शनिवार शाम से ही एक अस्पताल में चले गए हैं।

इसका प्रसारण विभिन्न चैनलों पर हुआ। गुप्ता ने बेंच को बताया कि यदि ऐसा हुआ है तो यह गंभीर बात है, क्योंकि सरकार दावा कर रही है कि डेरे में सुबह तक पुलिस तैनात थी। यदि डेरे का दावा है कि रामपाल शनिवार शाम को ही निकल गए तो स्पष्ट है कि सरकार ने गिरफ्तारी के बजाय रामपाल की मदद की। हाईकोर्ट ने कहा है कि अंतिम फैसला देते वक्त इस दलील का अवश्य ध्यान रखा जाएगा। रामपाल केनए वारंट जारी कर डीजीपी व गृह सचिव को 21 नवंबर तक रामपाल को पेश करने का निर्देश दिया।
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रामपाल को उठाना होगा सुरक्षा प्रबंधों का खर्च

हाईकोर्ट की बेंच ने फैसले में कहा कि हाईकोर्ट में पेशी व गिरफ्तारी वारंट लागू कराने के लिए सुरक्षा इंतजाम के लिए रामपाल जिम्मेवार होंगे। इसका खर्च उन्हें ही उठाना पड़ेगा। बेंच ने केंद्र, हरियाणा, पंजाब व यूटी से सुरक्षा प्रबंधों पर खर्च का ब्योरा पेश करने को कहा है।

जमानत पर फैसला मंगलवार को
बेंच ने स्पष्ट किया कि कत्ल केस में हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द करने पर मंगलवार को ही फैसला दे दिया जाएगा। रामपाल की वकालत कर रहे आरएस राय ने केस छोड़ने की मंजूरी मांगी और एसके गर्ग नरवाना संत के नए वकील हो गए हैं। उन्हें बेंच ने नोटिस जारी कर हर हाल में मंगलवार को ही जमानत पर बहस करने का निर्देश दिया है।
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