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रामपाल मुद्दे पर कांग्रेस-भाजपा में तीखे तेवर

Mon, 24 Nov 2014 05:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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रामपाल मामले में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। भाजपा नेताओं ने रामपाल के सतलोक आश्रमों को लेकर हुड्डा सरकार पर हमला बोला है। भाजपा विधायक का तो यहां तक कहना है कि कांग्रेस सरकार के संरक्षण में बने बरवाला आश्रम में कुछ कांग्रेसी भी इसके ट्रस्टी हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाने वालों से नाम सार्वजनिक करने को कहा है। आरोप है कि प्रकरण में दस दिन तक भाजपा सरकार सोई रही।
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रामपाल मामले को लेकर भाजपा विधायक मनीष ग्रोवर ने पूर्व हुड्डा सरकार पर हमला बोला है। कहा, 2006 में करौंथा कांड के बावजूद बरवाला में आलीशान आश्रम बन गया। इसके लिए पूर्व कांग्रेस सरकार जिम्मेदार है। आश्रम सरकार की बिना सहमति और सहयोग के बनना मुमकिन नहीं है। आम जनता को छोटा सा मकान बनाने के लिए दर्जनभर विभागों से एनओसी, नक्शा बनवाने के लिए पसीने बहाने पड़ते हैं और बरवाला में इतना बड़ा आश्रम तैयार हो गया।

विधायक ग्रोवर ने कहा, करौंथा में किए गुनाह के बाद अगर रामपाल को तत्कालीन सरकार का संरक्षण न मिलता तो इस तरह का आश्रम नहीं बन सकता था। आरोप लगाया कि पिछली हुड्डा सरकार के कुछेक बड़े नाम भी आश्रम के ट्रस्टी हैं। उन्होंने बरवाला के हालात काबू करने के लिए सीएम मनोहर लाल खट्टर व हरियाणा पुलिस का आभार व्यक्त किया। विधायक ग्रोवर रविवार को गांधी कैंप में हरिओम सेवा दल की ओर से लगाए गए रक्तदान शिविर में बोल रहे थे।
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रामपाल को पकड़ने में हुई सौदेबाजी: कांग्रेस

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा ने कहा कि भाजपा सतलोक आश्रम से कांग्रेसियों के जुड़े होने का आरोप लगा रही है तो नाम सार्वजनिक क्यों नहीं करती। बरवाला में 10 दिन विवाद चला तब सीएम और गृहमंत्री कहां थे। पुलिस को रामपाल समर्थकों के समक्ष लावारिस छोड़ दिया गया।

संत रामपाल को पकड़ने में सौदेबाजी हुई है। बरवाला एक छोटा सा कस्बा है, वहां शहरों की तरह नियम कानून लागू नहीं होते। कोई देहात में जमीन खरीदकर क्या कर रहा है, इसकी सारी जानकारी सरकार तक पहुंचे जरूरी नहीं है। शहर के नियम गांव में लागू नहीं होते। यदि कांग्रेस के किसी सदस्य ने इसमें मदद की है तो वह गुनहगार है, भाजपा को उसका नाम सार्वजनिक करना चाहिए।

हुड्डा ने कहा कि भाजपा के स्थानीय विधायक या अन्य लोगों को राजनीति का अनुभव ही नहीं है, वे विकास कार्य छोड़ आरोप-प्रत्यारोप से जनता को उलझाने में जुटे हैं। कांग्रेस सरकार की ओर से कराए गए विकास कार्यों की मरम्मत व देखरेख करना भी भाजपा के बस में नहीं है। पूर्व कांग्रेस सरकार के कुछ लोगों का आश्रम का ट्रस्टी होने का आरोप निराधार है। यह राजनीतिक अनुभव हीनता का परिचायक है।
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