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सीसीईटी में अधिक दाखिलों के लिए तैयार किया गया संत लौंगोवाल पैटर्न 16 साल में लागू नहीं हो सका

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीसीईटी) में लेटरल इंट्री से 50 फीसदी छात्रों के दाखिले के लिए तैयार संत लोंगोवाल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (संगरूर) पैटर्न लागू नहीं हो सका। 16 साल बीत गए लेकिन यह पैटर्न केवल कागजों तक ही सीमित है। वहीं, छात्रों को अपने भविष्य की चिंता है। ऐसे में उन्होंने इस मुद्दे को फिर से उठाया है। साथ ही कुछ शिक्षकों ने भी छात्रों के साथ मिलकर यूटी प्रशासन को पत्र भेजकर इस पैटर्न को लागू करने के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश करने की मांग की है।
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पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) को जब डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाया गया तो चंडीगढ़ के विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग कोर्सेज में कोटा देने के लिए सीसीईटी डिग्री विंग का निर्माण किया गया, जो डिप्लोमा विंग के साथ ही संचालित था। उस दौरान समझौता हुआ था कि संत लोंगोवाल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (संगरूर) के पैटर्न को लागू किया जाएगा। इससे आईटीआई के विद्यार्थी यदि डिप्लोमा करेंगे तो उनको 50 फीसदी लेटरल एंट्री मिल सकेगी। इससे उनके डिप्लोमा का सपना पूरा हो सकेगा।
वहीं, डिप्लोमा के छात्र डिग्री कोर्सेज कर सकेंगे। पत्र में बताया गया है कि यह पैटर्न तैयार हुआ और कमेटी ने इस पर मुहर लगा दी। यूटी प्रशासन ने केंद्र सरकार को यह प्रस्ताव भेज दिया लेकिन यह प्रस्ताव आज तक लागू नहीं हो पाया। छात्रों व शिक्षकों ने कहा है कि यदि यूटी प्रशासन इस मामले का फालोअप करता तो शायद यह पैटर्न लागू हो जाता। दाखिले अधिक होते तो विद्यार्थियों को भी इसका फायदा मिलता, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
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अब लेटरल एंट्री से महज 10 फीसदी ही छात्रों को डिप्लोमा व डिग्री में दाखिले मिल पा रहे हैं। बहुत से विद्यार्थियों की पढ़ाई यहां नहीं हो पाती। इससे छात्रों में आक्रोश है। वे चाहते हैं कि उन्हें पढ़ाई के लिए बाहर न जाना पड़े, इसलिए यह पैटर्न लागू करना जरूरी है। कहा कि इस पैटर्न के लागू होने से सीसीईटी की व्यवस्था एक रूप से चलेगी। एक ही यहां हेड होगा। डिग्री व डिप्लोमा विंग के लिए अलग-अलग अफसर नहीं होंगे। सूत्रों का कहना है कि यहीं पर आकर मामला फंस रहा। पैटर्न लागू होने से इसका संचालन केंद्र के अधीन हो जाएगा। छात्रों ने कहा है कि अफसर इस प्रकरण को प्रमुखता से लें और केंद्र सरकार से पैटर्न लागू करवाने के लिए प्रयास करें ताकि छात्रों केे लाभ मिल सके।
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