पंजाब की एक और हस्ती ने किसानों के आंदोलन के समर्थन में पद्मश्री सम्मान लौटाने की घोषणा की है। दिल्ली के नजदीक चल रहे किसानों के आंदोलन के समर्थन में पर्यावरण प्रेमी संत बाबा सेवा सिंह ने पद्मश्री सम्मान वापस करने का एलान किया है। 31 मार्च 2010 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने संत बाबा सेवा सिंह को पद्मश्री सम्मान से नवाजा था।
संत बाबा सेवा सिंह पर्यावरण के क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने पंजाब के साथ-साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश व अन्य राज्यों में लाखों की तादाद में पौधे लगाए हैं। श्री गुरु नानक देव जी के 551वें प्रकाश पर्व के संबंध में राज्य में 551 बाग लगाने का बीड़ा उठाने वाले संत बाबा सेवा सिंह ने शुक्रवार को खडूर साहिब में एलान किया कि वह पद्मश्री वापस लौटा रहे हैं।
संत बाबा सेवा सिंह ने कहा कि देश का किसान अपना वजूद बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार किसानों पर अत्याचार कर रही है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पद्मश्री सम्मान लोक व समाज भलाई के बदले मिलते हैं। ऐसे में पद्मश्री सम्मान रखना किसान हितों को नजरअंदाज करने के बराबर है।
उन्होंने कहा कि कड़ाके की सर्दी में सड़कों पर दिन रात गुजार रहे किसानों के हितों में ऐसा सम्मान न्योछावर करना बहुत छोटा है। बाबा सेवा सिंह ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि किसान हितों को नजरअंदाज किए जाने के रोष में यह सम्मान वापस कर रहा हूं। मुझे उम्मीद है कि देश के राष्ट्रपति किसानों के हितों के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।
तीन और पूर्व खिलाड़ियों ने अवार्ड लौटाने की घोषणा की
कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में पंजाब के पूर्व तीन अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने केंद्र सरकार को अवार्ड लौटाने का एलान किया है। 1982 में नई दिल्ली में हुई एशियाई खेलों में मुक्केबाजी मुकाबले में स्वर्ण पदक विजेता कौर सिंह ने पद्मश्री, पांच बार ओलंपिक खेलों में चीफ कोच की भूमिका अदा करने वाले गुरबख्श सिंह संधू ने द्रोणाचार्य अवार्ड और 1986 के सियोल एशियाई खेलों में पदक विजेता जयपाल सिंह ने अर्जुन अवार्ड लौटाने का एलान किया है।