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एशियन गेम्सः बेटे की जीत के लिए मां रोज मांगती थी दुआ, सिल्वर मेडल जीत दिया तोहफा

Wed, 22 Aug 2018 09:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, यमुनानगर (हरियाणा)
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संजीव राजपूत का परिवार
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एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाले संजीव राजपूत के पिता को जहां अपने बेटे पर गर्व हैं, तो वहीं मां की दुआ का असर भी का असर भी हुआ। बेटे की जीत के लिए मां रोजाना शाम सुबह एक यात्रा में निकलती थी। 
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जगाधरी के संजीव राजपूत ने एशियन गेम्स की शूटिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। शूटिंग में बेटे की जीत के लिए मां उषा रानी रोजाना सुबह शाम पंचमुखी हनुमान मंदिर में दुआ करने जाती थी। मंगलवार को मां की दुआ ने असर किया और बेटे के सिर जीत का सेहरा बंध गया। संजीव के गेम को देखने के लिए सुबह से ही परिजन टीवी के साथ चिपके हुए थे। जैसे ही उन्हें पदक मिलने का ऐलान हुआ।

परिजन खुशी से झूम उठे। कुछ ही देर में घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। संजीव के पिता ने कहा कि हमें इस बार गोल्ड की उम्मीद थी लेकिन एक प्वाइंट से चूक गए। मेरे बेटे ने देश का नाम रोशन किया है, यह हमारे लिए गर्व की बात है।    
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संजीव के परिवार में पिता किशनलाल, मां ऊषा रानी, भाई मनोज सिंह राजपूत तथा भाभी शिवानी और एक भतीजा और भतीजी है। पिता किशनलाल राजपूत ने बताया कि इस बार उन्हें गोल्ड की उम्मीद थी और वह शुरू से आगे ही चल रहा था, लेकिन सिल्वर पदक हासिल हुआ। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे ने भारत का मान बढ़ाया है और हमें उस पर गर्व है। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने बेटे पर नाज है और उन्होंने भारत का मान बढ़ाया और दूसरे स्थान पर भारत को खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि मुश्किल दौर में उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बेटे का हौसला बढ़ाते रहे।       
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शूटर चाचा के भतीजे और भतीजी की स्केटिंग में है रुचि  

संजीव राजपूत का परिवार
 संजीव राजपूत के एक भतीजा मृदुल और एक भतीजी यशिका है। चाचा के शूटिंग में सिल्वर मेडल आने से वह बहुत खुश है। उन्होंने बताया कि वह भी खेलों में ही अपना प्रयास जारी रखेंगे और चाचा की तरह ही देश का नाम रोशन करेंगे। वह स्वामी विवेकानंद स्कूल में पढ़ते हैं और वहीं स्केटिंग करते हैं।

संजीव राजपूत की उपलब्धियां 
- अर्जुन अवार्ड       
- बेस्ट सर्विसेज स्पोर्ट्समैन       
- आइएसएसएफ वर्ल्ड कप फाइनल्स म्यूनिख      
- आइएसएसएफ वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल        
- 45वीं वर्ल्ड मिलिट्री शूटिंग चैंपियनशिप ब्रांज में चौथा स्थान        
- 18वीं कॉमनवेल्थ गेम्स मेलबोर्न-2006- ब्रांज मेडल       
- 20वीं कॉमनवेल्थ गेम्स, ग्लास्गो -2014- सिल्वर मेडल       
- सातवीं कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप मेलबोर्न-2005 गोल्ड मेडल       
- आठवीं कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, न्यू दिल्ली-2010 एक गोल्ड मेडल और एक सिल्वर        
-15वीं एशियन गेम्स दोहा-2006 ब्रांज मेडल
-16वीं एशियन गेम्स गोंगझोऊ, चाइना-2010 में सिल्वर मेडल  
- 11वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप कुवैत- 2007 में दो सिल्वर व एक ब्रांज       
- 12वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप-2012- दोहा में दो गोल्ड       
- तीसरी एयरगन चैंपियनशिप दोहा- 2009 में गोल्ड मेडल       
- छठी एयरगन चैंपियनशिप तेहरान-2013 में दो गोल्ड, एक सिल्वर व एक ब्रांज, एसएएफ गेम्स       
- इस्लामाबाद- 2004 में तीन गोल्ड व एक सिल्वर       
- पांचवीं एसएएफ शूटिंग चैंपियनशिप, ढाका- 2009 में चार गोल्ड व दो सिल्वर       
- मेलबोर्न- 2006 में एक ब्रांज       
- हंगरी एयरगन ओपन-2008 में सिल्वर       
- आस्ट्रेलिया कप सिडनी-2008 में एक गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रांज       
- 21 वें कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल        
- 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में संजीव ने 50 मीटर राइफल रजत पदक।        
- 2016 बाकू में अपना पहला विश्वकप पदक जीता।  
     
 
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