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बजट है, फिर भी पंजाब यूनिवर्सिटी में नहीं लगा रहीं सेनेटरी नैपकिन मशीनें, मांगपत्र का हो रहा इंतजार

Thu, 13 Feb 2020 02:50 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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पंजाब यूनिवर्सिटी छात्राओं के स्वास्थ्य को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है। यहां वेंडिंग मशीन के लिए बजट तो हर साल बनता है, लेकिन छात्राओं की ओर से कोई मांग पत्र न आने से विभाग के अधिकारी मशीन लगवाते ही नहीं हैं।
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पीयू में वर्ष 2017 में विद्यार्थियों और स्टूडेंट काउंसिल की मांग के बाद छात्रावासों और विभागों के लिए सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन का प्रस्ताव पास किया गया था, लेकिन दो साल बाद भी मशीनें नहीं लगी हैं। कुछ छात्रावासों में मशीन लगवाई भी गई थीं, उनमें नैपकिन रिफिल नहीं किए जाते हैं।

जागरूकता के अभाव में छात्राओं को भी नहीं पता कि विभागों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगवाना अनिवार्य है। पीयू के 80 विभागों में से लॉ विभाग और यूआईईटी ब्लॉक-2 में कई बार मांग के बाद वेंडिंग मशीन लगी थी।
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बिना नैपकिन लगी हैं वेंडिंग मशीनें
महिला छात्रावास नंबर-7 निवासी मन्नत ने बताया कि उनके छात्रावास में मशीन नहीं लगी है। छात्रावास नंबर-2 की नवप्रीत और छात्रावास-6 की पाहुल ने बताया कि उनके छात्रावास में मशीनें तो लगी हैं, लेकिन साथ में नोटिस लगा है कि इसे खुद ऑपरेट नहीं करना है।

छात्रावास नंबर-3 की अंजलि ने बताया कि हमारे छात्रावास में 2017 में मशीन लगवाई गई थी, लेकिन वह सिर्फ एक महीने तक ही वर्किंग थी। उसके बाद उसमें नैपकिन रिफिल नहीं किए गए। मोनिका ने बताया कि छात्रावास नंबर-4 में मशीन लगी हैं। छात्रावास-8 निवासी शैली ने बताया कि उनके यहां मशीन नहीं लगी है।

लॉ विभाग में लगी मशीन, लेकिन नैपकिन की कीमत ज्यादा
थ्री ईयर लॉ की छात्रा बेनजीर ने बताया कि कई बार पत्र लिखने के बाद हमारे विभाग में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन तो लगवा दी गई है, लेकिन उसमें 5 रुपये प्रति नैपकिन कीमत है। जब हमें पता चला कि पीयू में मशीनों के लिए प्रस्ताव पास हुआ है, तो हमने अपने विभाग के लिए मांग की। उस दौरान हमें लगा थी कि नैपकिन फ्री या कम कीमत पर मिलेंगे, लेकिन नैपकिन की कीमत मार्केट रेट के बराबर ही है। इसके साथ ही क्वालिटी भी रेट के अनुसार अच्छी नहीं है।

वर्ष 2017 में पीयू में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन को लेकर प्रस्ताव पास किया गया था, लेकिन शायद विभागों में अभी तक मशीनें नहीं लगवाई गई हैं। इसको लेकर कई बार मीटिंग में चर्चा भी की गई है।
- चेतन चौधरी, अध्यक्ष, स्टूडेंट काउंसिल

वेंडिंग मशीनें लगवाने के लिए विभागों को बजट दिया जाता है। इसकी जिम्मेदारी भी विभागों की है। छात्रावासों में मशीनें लगी हैं। जहां पांच रुपये के दो नैपकिन मिलते हैं। यूनिवर्सिटी की तरफ से यह सुविधा है, इसे हम फ्री में तो नहीं दे सकते।
- नीना कपलाश, डीएसडब्ल्यू (वुमन), पीयू

आर्ट्स ब्लॉक-4 में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन नहीं लगी है। इसके लिए बजट के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा कुछ है तो मैं पता करूंगी।
- प्रो. रानी मेहता, चेयरपर्सन समाजशास्त्र, आर्ट्स ब्लॉक-4

पिछले हफ्ते विभाग के विद्यार्थी मेरे पास सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन का प्रस्ताव लेकर आए थे। इसको लेकर हमने चर्चा की है। जल्द नैपकिन की क्वालिटी को ध्यान में रखकर मशीन लगवा दी जाएगी।
- प्रो. रतन सिंह, डायरेक्टर, यूआईएलएस

कुछ छात्रावासों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन नहीं है। 10 फरवरी को इस संबंध में डीएसडब्ल्यू को पत्र लिखा है। इससे पहले भी हम इसे लेकर पत्र लिख चुके हैं और मीटिंग में भी कई बार चर्चा की गई है।
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- मनप्रीत सिंह माहल, ज्वाइंट सेक्रेटरी, स्टूडेंट काउंसिल
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