चंडीगढ़ के पांच भाई बहन और पांचों की पीएचडी डिग्री होल्डर्स
- फोटो : अमर उजाला
घर में आर्थिक तंगी थी, उसके बावजूद पांच भाई-बहनों ने पीएचडी की डिग्री हासिल की और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन लर्निंग (यूसोल) पत्राचार विभाग में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में कार्यरत असिस्टेट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार को कैंपस में आजकल जमकर बधाईयां मिल रही हैं।
डा. अनिल और उनके चार भाई बहनों द्वारा पीएचडी की डिग्री हासिल करने पर परिवार का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज हो गया है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि 21 अगस्त को लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड ने परिवार को खास रिकार्ड का सर्टिफिकेट जारी किया है। डॉ. अनिल के परिवार का नाम अब अंतराष्ट्रीय स्तर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड के लिए भी भेजा गया है।
कठिन हालात में किया यह कारनामा
चंडीगढ़ के पांच भाई बहन और पांचों की पीएचडी डिग्री होल्डर्स
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पिता भगवानदास और मां रेखा के लिए पांच बच्चों को पीएचडी करवाने का सफर आसान नहीं था। भगवान दास ने 1978 में करीब 200 रुपये से झांसी स्थित पंडित रामसहाय शर्मा इंटर कॉलेज में सहायक लिपिक की नौकरी ज्वाइन की। बच्चों को पढ़ाने के खर्च के लिए नौकरी के साथ ही पिता की दुकान पर भी काम किया।
मां रेखा सुबह 4 बजे बच्चों को पढ़ाने के लिए उठाती और फिर दिनभर पांच बच्चों की देखभाल में जुट जाती। डॉ. अनिल ने बताया कि हमें पढ़ाने के लिए पिता को गांव छोड़ शहर में किराए के छोटे से मकान में सालों गुजारने पड़े। पिता ने अपनी सारी पूंजी पांचों भाई बहनों पर लगा दी।
पांचों बहन भाईयों ने अलग विषय में की है पीएचडी
डॉ. अनिल ने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय में जेएनयू से 2016 में पीएचडी डिग्री हासिल की है। वाराणसी में नियुक्त असिस्टेट कंट्रोलर वेट एंड मैजरमेंट बड़े भाई मुकेश कुमार ने मैनेजमेंट विषय में बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, असिस्टेंट प्रोफेसर रागिनी ने ज्योलॉजी, सिंगापुर में एरिया मैनेजर हार्टिकल्चर मोहिनी ने बोटनी और लखनऊ स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में असिस्टेट प्रोफेसर सोहिनी ने समाज शास्त्र में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। पिता 12वीं पास और मां 10वीं तक पढ़ी हैं।
ट्यूशन पढ़ाकर पिता को दिया सहारा
चंडीगढ़ के पांच भाई बहन और पांचों की पीएचडी डिग्री होल्डर्स
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डॉ. अनिल बताते हैं कि पिता का सपना पांचों भाई-बहनों को इंजीनियर और मेडिकल की पढ़ाई करवाने का सपना था, लेकिन फीस अधिक होने और आर्थिक तंगी के कारण ऐसा नहीं हो सका।
अनिल ने बताया कि उनके भाई बहन पढ़ाई में काफी तेज थे। 10वीं और 12वीं करते सभी ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर पिता को आर्थिक सहारा देना शुरू कर दिया, जिससे आगे की पढ़ाई जारी रह सकी।
समाज के लिए प्रेरणा बना पूरा परिवार
भगवानदास अहिरवार का पूरा परिवार उन परिवारों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो आर्थिक अभाव का हवाला देकर बच्चों स्कूल और कॉलेज नहीं भेजते। बड़े भाई मुकेश बताते हैं कि पिता ने हमेशा बेटे और बेटियों दोनों को पढ़ाई के लिए बराबर का मौका और संसाधन दिए।
सभी भाई बहन आलराउंडर थे। बड़े भाई मुकेश बॉस्केटबाल के नेशनल स्तर के प्लेयर रहे हैं, जबकि रागिनी और सोहिनी नेशनल स्तर की चैंपियन रही हैं। आज पूरा परिवार रिश्तेदार और पड़ोसियों के लिए मिसाल बन चुका है।