मोरनी और पिंजौर टूरिस्ट पैलेस जल्द ही सुगम सड़क मार्ग से जुड़ जाएंगे। साथ ही थापली पंचायत के हजारों लोगों को भी परेशानी से निजात मिल जाएगी।
टुंडा-थापली नदी पर सरकार द्वारा करीब पांच करोड़ की लागत से पुल बन रहा है और इसका काम लगभग पूरा हो चुका है।
वहीं, थापली पर भी पुल का काम शुरू हो गया है। इन दोनों पुलों के बनने से मोरनीवासियों के लिए पिंजौर-कालका मार्ग बेहद छोटा हो जाएगा और थापली, मांधना, टीपरा, नाइटा, घामण पंचायत सहित पिंजौर खंड क ी सैकड़ों पंचायतें एक-दूसरे से जुड़ जाएंगी।
इससे मोरनी को हिमाचल से और पंचकूला से नाहन का सफर भी आसान हो जाएगा। इस मार्ग से 40-50 किमी का सफर कम हो जाएगा।
सदियों से मोरनी खंड की थापली पंचायत के आधा दर्जन से अधिक गांवों के हजारों लोग बरसात के साथ ही मोरनी सहित पूरे देश दुनिया से बिल्कुल कटकर अलग-थलग हो जाते थे।
बरसात के दिनों में यदि कोई अधिक बीमार हो जाए तो चिकित्सा लेना भी मुश्किल हो जाता है। वहीं, सभी स्कूली बच्चो को बरसात के बाद भी दो तीन दिन बाद तक भी स्कूल जाने से वंचित रहना पडता था ।
कुल मिलाकर यहां थापली पंचायत के इन आधा दर्जन से अधिक गांवो खासतौर पर थापली के दो बास ,ब्रूण ,बालू, जौनपूर, आदि कईयो गांव तो ऐसे है जिनके दोनो और नदियां है। जिन पर कोई पूल या गुजरने का रास्ता नही था। ऐसे मे यहां बरसात के साथ ही इन गांवो की हजारों की आबादी का जीवन बरसात मे पूरी तरह ठहर जाता था।
पूर्व सरपंच घनश्याम शर्मा, महेन्द्र, जयपाल, कश्मीर आदि ने बताया कि इस क्षेत्र के गांवों के एक ओर पिंजौर और दूसरी ओर मोरनी पड़ता है, जहां जाने के लिए एक ओर घग्गर नदी तो दूसरे सिरे पर टुंडा नदी पड़ती है।
उनकी पंचायतों के नदी से घिरे क्षेत्र में केवल एक प्राथमिक स्कूल है और यहां नदियों के आसपास के गांवों में चिकित्सा सेवा का भी प्रबंध नहीं है।