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Ground Report: ध्रुवीकरण पर टिका फैसला... वोटर बंटे तो 'हाथ' की राह मुश्किल, न बंटे तो 'कमल' के लिए डगर कठिन

चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, रोहतक Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 24 May 2024 09:27 AM IST

सार

इस सीट पर ध्रुवीकरण पर फैसला टिका है। यहां एक ही सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। 2019 में भाजपा 7503 वोटों से हारी थी। क्या इस बार कांग्रेस जीत दर्ज कर पाएगी। 
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Rohtak Lok Sabha Election - फोटो : अमर उजाला
जीत की हैट्रिक लगाने के बाद पहली हार का सामना करने वाले दीपेंद्र हुड्डा अपने भाषण में मेरे 36 बिरादरियों के साथियों व बुजुर्गों...मुझे आप सभी का आशीर्वाद चाहिए, कहना नहीं भूल रहे। किसान आंदोलन के मुद्दे को हवा देने से परहेज कर रहे हैं। इसी आंदोलन की वजह से कुछ जगह हुए भाजपा नेताओं के विरोध पर खामोशी दिखा रहे हैं। 

अपने लोगों से कह रहे हैं, हमें हंगामा नहीं, सिर्फ वोट की चोट करनी है। साफ लग रहा है कि हार से सबक लेकर उनका मकसद ध्रुवीकरण रोकना है। कई जगह जाट उनके लिए काफी मुखर हैं। यह मुखरता पिछले चुनाव में भी थी। तब प्रतिक्रिया में दूसरी ओर भी ध्रुवीकरण हो गया और पहली बार भाजपा जीत गई।


इस बार भाजपा एकसाथ दो रणनीति पर काम कर रही है। यादव, ब्राह्मण, सैनी, पंजाबी और दलित समाज के नेताओं की फौज ने डेरा डाल दिया है। उनकी ओर से जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान के कांग्रेस नेताओं के बयान उछाले जा रहे हैं। इसका मकसद गैर जाट बिरादरियों की गोलबंदी अपने पक्ष में करना लग रहा है। 

दूसरा, बड़े जाट बहुल गांवों में युवा सम्मेलन कर भाजपा नेता कह रहे हैं, हमने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिया, जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति बनाया और संगठन में जाट समाज के नेताओं को महत्वपूर्ण पद दिए। जाहिर है भाजपा जाट मतदाताओं में सेंध लगाना चाहती है। इसके लिए खाप चौधरियों की मदद भी ली जा रही है।
 
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Rohtak Lok Sabha Election - फोटो : अमर उजाला
जीत की हैट्रिक लगाने के बाद पहली हार का सामना करने वाले दीपेंद्र हुड्डा अपने भाषण में मेरे 36 बिरादरियों के साथियों व बुजुर्गों...मुझे आप सभी का आशीर्वाद चाहिए, कहना नहीं भूल रहे। किसान आंदोलन के मुद्दे को हवा देने से परहेज कर रहे हैं। इसी आंदोलन की वजह से कुछ जगह हुए भाजपा नेताओं के विरोध पर खामोशी दिखा रहे हैं। 

अपने लोगों से कह रहे हैं, हमें हंगामा नहीं, सिर्फ वोट की चोट करनी है। साफ लग रहा है कि हार से सबक लेकर उनका मकसद ध्रुवीकरण रोकना है। कई जगह जाट उनके लिए काफी मुखर हैं। यह मुखरता पिछले चुनाव में भी थी। तब प्रतिक्रिया में दूसरी ओर भी ध्रुवीकरण हो गया और पहली बार भाजपा जीत गई।

इस बार भाजपा एकसाथ दो रणनीति पर काम कर रही है। यादव, ब्राह्मण, सैनी, पंजाबी और दलित समाज के नेताओं की फौज ने डेरा डाल दिया है। उनकी ओर से जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान के कांग्रेस नेताओं के बयान उछाले जा रहे हैं। इसका मकसद गैर जाट बिरादरियों की गोलबंदी अपने पक्ष में करना लग रहा है। 

दूसरा, बड़े जाट बहुल गांवों में युवा सम्मेलन कर भाजपा नेता कह रहे हैं, हमने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिया, जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति बनाया और संगठन में जाट समाज के नेताओं को महत्वपूर्ण पद दिए। जाहिर है भाजपा जाट मतदाताओं में सेंध लगाना चाहती है। इसके लिए खाप चौधरियों की मदद भी ली जा रही है।
 

बीटेक, एमबीए और एलएलबी की डिग्री हासिल कर राजनीति में आए 46 वर्षीय राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा का चौथा लोकसभा चुनाव है, जबकि 57 वर्षीय डेंटल सर्जन अरविंद शर्मा आठवीं बार उतरे हैं।

कांग्रेस, शिवसेना व बसपा में रहने के बाद भाजपा में आए अरविंद 1996 में सोनीपत से निर्दलीय, 2004 और 2009 में कांग्रेस के टिकट पर करनाल और पिछली बार भाजपा के निशान पर रोहतक से संसद पहुंचे। 1998 में सोनीपत, 1999 में रोहतक और 2014 में करनाल में हारे। 2014 में बसपा के टिकट पर विधायकी चुनाव भी हारे।

कोसली के यादव वोटर सबसे अहम
रोहतक लोकसभा क्षेत्र में रोहतक, झज्जर और रेवाड़ी की नौ विधानसभा सीटें हैं। 2019 में कांग्रेस पांच गढ़ी सांपला-किलोई, महम, बेरी, बादली और झज्जर में आगे रही। भाजपा को चार रोहतक, कलानौर, बहादुर और कोसली में बढ़त मिली। इनमें कोसली की बढ़त 74,980 वोटों की थी, जिसने परिणाम भाजपा के पक्ष में कर दिया। यादव बहुल कोसली अरिहवाल बेल्ट (महेंद्रगढ़ तक का इलाका) में आता है। 

लोकसभा के बाद हुए विधानसभा चुनाव में कांंग्रेस ने नौ में से सात गढ़ी सांपला-किलोई , रोहतक शहर, कालानोर (एससी आरक्षित), बहादुरगढ़, बादली, झज्जर (एससी आरक्षित) और बेरी सीट जीती, जबकि एकमात्र कोसली में ही कमल खिला। महम से निर्दलीय विधायक है। गढ़ी-सांपला-किलोई से भूपेंद्र हुड्डा विधानसभा में हैं।

हुड्डा परिवार का दबदबा
रोहतक लोकसभा सीट पर हुड्डा परिवार का दबदबा रहा है। दीपेंद्र के दादा स्वतंत्रता सेनानी रणबीर हुड्डा 1952 और 1957 में और पिता भूपेंद्र हुड्डा 1991, 1996, 1998 व 2004 में जीते। 2005 में भूपेंद्र सीएम बन गए। 
 

इसके बाद दीपेंद्र तीन बार सांसद बने। 2005 के उप चुनाव, 2009 और 2014 में। दो उप चुनाव मिलाकर कुल 18 चुनाव हुए हैं। इनमें से आधे यानी नौ हुड्डा परिवार ने जीते हैं। इसी सीट से 1989 में जीते चौधरी देवी लाल देश के उप प्रधानमंत्री बने थे। यहां से मुख्तार सिंह, शेर सिंह, स्वामी इंद्रवेश, कैप्टन इंद्रसिंह भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
 

मुद्दों की बात
एसपी दफ्तर के पास मान सरोवर पार्क में किसान चौधरी गजे सिंह और रोहताश वर्मा कहते हैं कि महंगाई और बेरोजगारी बड़े मुद्दे हैं। रेल किराये में मिलने वाली छूट खत्म हो जाने से बुजुर्गों में नाराजगी है। इससे थोड़ी ही दूरी पर रबड़ी-फालूदा का ठेला लगाने वाले रवि किशन कहते हैं कि फ्री राशन से गरीबों को बड़ी राहत मिली है, वोट मोदी के नाम पर ही पड़ेगा। अशोक नगर में संदीप का कहना है कि सबसे बड़ा मुद्दा किसान आंदोलन है।

बसंत विहार भाग-दो में सविता ने राममंदिर को मुद्दा बताया। झज्जर में वीरेंद्र राठी का कहना था कि यहां चुनाव मुद्दों पर नहीं जातीय आधार पर ध्रुवीकरण पर होता है। अहिरवाल बेल्ट के फौजियों का गांव कहे जाने वाले कोसली में सूबेदार ( रिटायर्ड ) जतिन कुमार कहते हैं अग्निवीर योजना से युवाओं में निराशा है। इसी गांव के श्रीभगवान का कहना है कि वोट उम्मीदवार नहीं, सेना और देश को मजबूत करने के लिए मोदी के नाम पर पड़ेगा।

2016 की हिंसा से बदले समीकरण
हरियाणा में 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा ने रोहतक के चुनावी समीकरण बदल दिए। हिंसा का ऐसा असर हुआ कि चुनाव में मतदाताओं का ध्रुवीकरण जाट और गैर जाट के आधार पर होने लगा। बदले हालात में भाजपा ने 2019 में ब्राह्मण कार्ड चलते हुए अरविंद शर्मा को उतारा और वे जीत गए। इससे पहले 2014 की मोदी लहर के बावजूद भाजपा उम्मीदवार ओम प्रकाश धनखड़ को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
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