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बेकाबू जाट आंदोलन, रोहतक IG पर गिरी पहली गाज, तबादला

Mon, 22 Feb 2016 09:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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आरक्षण की आग के बाद उपद्रवियों के बवाल को रोकने में भले ही पूरा तंत्र नाकाम रहा हो, लेकिन पहली गाज रोहतक रेंज के आईजी श्रीकांत जाधव पर गिरी है। इसका सबसे बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि रोहतक में जब चिंगारी भड़कनी शुरू हुई तो पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
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उसके बाद हालात बेकाबू हो गए और आग पूरे प्रदेश में फैलती चली गई। अगर पहले ही दिन पुलिस कड़ा रुख अपनाती तो शायद चिंगारी नहीं भड़कती, सब कुछ बच सकता था। जाट आरक्षण के लिए हिसार में आंदोलन शुरू हुआ, लेकिन वह शांतिपूर्ण तरीके से चलता रहा और उसे सरकार ने बातचीत करके खत्म भी करा दिया।

इसके बावजूद सांपला में रैली को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लापरवाह बने रहे, जिन्होंने जाट नेताओं के साथ ही खाप मुखियाओं से संपर्क नहीं बनाकर रखा। इस कारण ही सांपला में नेशनल हाईवे जाम किया गया। उससे भी पुलिस-प्रशासन नहीं सुधरा और उसका लापरवाही का आलम जारी रहा।
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जब एमडीयू के आगे जाम लगा दिया गया तो पुलिस ने वहां जाकर उनको समझाने की जरूरत भी नहीं समझी और वहां भीड़ बढ़ती चली गई। इसके बाद आंदोलन उग्र होता चला गया और उपद्रवी भी शामिल हो गए।

जब पुलिस ने उनसे बातचीत करके उठाना चाहा तो उस समय तक देर हो चुकी थी और उपद्रवी आक्रामक रुख अपनाकर बवाल करने लगे। तब भी पुलिस ने सख्ती नहीं दिखाई और चिंगारी भड़कती चली गई।

आग लगी तो सबसे पहले रोहतक झुलसा और फिर आसपास के जिलों झज्जर, भिवानी, सोनीपत तक चलते-चलते आग पूरे प्रदेश में फैल गई। इस तरह पुलिस-प्रशासन की लापरवाही पूरी तरह से सामने आयी, जिससे आम जनता आग की लपटों में आकर झुलसती रही।

पुलिस-प्रशासन के सामने ही लोगों की कमाई लुटती रही और व्यापार जलता रहा, लेकिन वह देखती रही। इस बड़ी नाकामी में सबसे पहली गाज रोहतक के आईजी श्रीकांत जाधव पर गिरी है। हालांकि कहा जा रहा है कि अभी कई अधिकारियों पर गाज गिरनी है, जिनकी लापरवाही सामने आयी है।
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