मनमोहन तिवारी का किरदार निभा रहे बॉलीवुड कलाकार रोहिताश्व गौड़
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आज हिंदी रंगमंच बहुत अच्छे मुकाम पर नहीं है। यह भी कह सकते हैं कि पहले भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। कारण हिंदी रंगमंच की पहले से मजबूत परंपराएं नहीं है। यह बात एंड टीवी के हास्य धारावाहिक ‘भाभी जी घर पर हैं’ में मनमोहन तिवारी का किरदार निभा रहे बॉलीवुड कलाकार रोहिताश्व गौड़ ने शूटिंग सेट के दौरान फोन पर अमर उजाला से साझा की।
गौड़ ने बताया कि स्कूल स्तर से ही थिएटर को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए। जैसा कि महाराष्ट्र, गुजरात और बंगाल में है। जब स्कूल में थिएटर एक विषय के रूप में होगा तो छोटे शहरों में अभिभावकों की सोच में भी परिवर्तन आएगा और उनको पता चलेगा कि यह पढ़ाई का ही एक हिस्सा है। बता दें कि रोहिताश्व गौड़ कालका के रहने वाले हैं। सोमवार को शूटिंग सेट पर उनके साथ योगेश त्रिपाठी (दरोगा हप्पू सिंह) ने भी अमर उजाला से विचार साझे किए।
रोहिताश्व ने कहा कि हिंदी थिएटर में दर्शक न होने के कारण मजबूरन कलाकार पैसा ओर शोहरत हासिल करने के लिए सीरियल की दुनिया कि ओर रुख कर रहे हैं। मराठी, गुजराती, बंगाली थिएटर की मजबूत परंपराएं होने के कारण वहां कलाकार पैसा भी कमाते हैं और खुश भी रहते हैं। अगर यही परंपराएं हिंदी रंगमंच में हों तो बात ही क्या है। इसके लिए सरकार को भी सहयोग करना होगा। बता दें कि गौड़ ने शौकिया रंगमंच की शुरुआत देव अर्जुन ड्रामाटिक क्लब कालका से की थी। इसके बाद शिमला से एनएसडी थिएटर वर्कशाप में एक्टिंग सीखी। फिर कालका कॉलेज से नाटक किए। वह यूथ फेस्टिवल में यूनिवर्सिटी लेवल तक बेस्ट एक्टर भी रहे। 1986 में कालका के सरकारी कालेज से ग्रेजुएशन के बाद उनका सिलेक्शन एनएसडी दिल्ली में हुआ, जहां से उन्होंने प्रोफेशनल तौर पर थिएटर सीखा। अपने पिता सुदर्शन गौड़ के मार्गदर्शन में वह छह साल तक एनएसडी रंगमंडल में नामी कलाकारों के साथ प्रोफेशनल थिएटर करते रहे। इसके बाद 1997 में वह मायानगरी में अपने अभिनय का जौहर दिखाने पहुंचे।