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'आप' विधायकों का सदन से वाकआउट, कैप्टन बोले- धरनों की सस्ती राजनीति बंद हो

Mon, 27 Mar 2017 10:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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'आप' विधायकों का सदन से वाकआउट - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब की नई कांग्रेस सरकार की ओर से वोट आन अकाउंट के लिए बुलाए गए विधानसभा के अल्पकालीन सत्र के दूसरे ही दिन मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी के सदस्य सदन से वाकआउट कर गए। खास बात यह भी है कि सूबे में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी के लिए भी यह पहला विधानसभा सत्र है। सोमवार को सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही कार्यकारी सलाहकार कमेटी की रिपोर्ट पेश की गई, जिसके अनुसार मंगलवार को सदन में राज्यपाल के भाषण के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाएगा। इस पर एतराज जताते हुए नेता प्रतिपक्ष एचएस फूलका ने स्पीकर से मांग की कि राज्यपाल के भाषण पर सदन में चर्चा कराई जाए।
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फूलका संवैधानिक नियमों का हवाला देते हुए अपनी मांग उठा रहे थे, वहीं स्पीकर राणा केपी ने उन्हें कहा कि उनकी बात सुन ली गई है, लेकिन फूलका अपनी मांग पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि भले ही यह विधानसभा सत्र कम अवधि का है, लेकिन राज्यपाल के भाषण पर कम के कम आधा दिन का समय तो चर्चा के लिए दिया जाना चाहिए। इस पर स्पीकर ने उन्हें यहां तक कहा कि सूबे में अभी नई सरकार ने काम करना शुरू ही किया है, उसे मौका दें, बाद में आपको भी अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। तभी स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा ने स्पीकर से कहा कि नियमानुसार राज्यपाल के भाषण पर चर्चा की अवधि कम से कम तीन दिन होती है, जो इस सत्र में संभव नहीं है और आधा दिन की मांग करना गलत है।

इस पर आम आदमी पार्टी के चीफ व्हिप सुखपाल खैरा ने कहा कि जब राज्यपाल भाषण दे चुके होंगे तो उस पर कोई चर्चा तो होगी? लोक इंसाफ पार्टी के सिमरजीत सिंह बैंस भी इस बहस में शामिल हो गए और उन्होंने स्पीकर से कहा कि कोई इमरजेंसी के हालात नहीं हैं कि सदन में राज्यपाल के भाषण पर तुरंत चर्चा नहीं कराई जा सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्ष को बात रखने क्यों नहीं दी जा रही? तभी नवजोत सिंह सिद्धू ने भी कहा कि अभी नई सरकार को काम तो शुरू करने दो। जब काम ही शुरू नहीं हुआ तो बहस कैसी? उन्होंने कहा कि सरकार बहस से नहीं भाग रही, लेकिन सरकार को शुरू तो होने दो।
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इस बहस के दौरान ही सदन के नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए प्रोटेम स्पीकर राणा केपी को पंजाब विधानसभा का स्पीकर नियुक्त किए जाने की घोषणा की। उधर, अपनी बात को अनदेखा होते देख आम आदमी पार्टी और लोक इंसाफ पार्टी के सदस्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सदन से उठकर चले गए।
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आप के सवालों से डर रही है कांग्रेस: फूलका

'आप' विधायकों का सदन से वाकआउट - फोटो : अमर उजाला
शिअद-भाजपा ने नहीं दिया आप का साथ
नेता प्रतिपक्ष एचएस फूलका जब राज्यपाल के भाषण पर चर्चा कराने के लिए समय दिए जाने की मांग कर रहे थे, तब सदन में शिअद-भाजपा के सदस्य चुपचाप बैठे रहे। उन्होंने स्पीकर के समक्ष इस संबंध में कोई सवाल नहीं उठाया और न ही विरोध किया। सोमवार को शिअद विधायक दल के नेता सुखबीर बादल और प्रकाश सिंह बादल सदन में मौजूद नहीं थे।

आप का वाकआउट दुर्भाग्यपूर्ण : कैप्टन
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्पीकर के चुनाव के समय आप के विधायकों की ओर से विधानसभा से वाकआउट के फैसले को अफसोसजनक बताया है। राज्यपाल के भाषण पर बहस के लोकतंत्रीय अधिकारों से वंचित करने के विरोध में सदन से वाकआउट करने के मामले पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्य विरोधी पार्टी को धरनों की सस्ती राजनीति करने की जगह सदन की मर्यादा को बनाए रखना चाहिए। 

आप के सवालों से डर रही है कांग्रेस: फूलका
पंजाब विधानसभा सदन से वॉकआउट करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष एचएस फूलका ने कहा कि सत्ताधारी कांग्रेस का यह कदम संविधान की उल्लंघना और लोकतंत्र की हत्या है। फूलका ने कहा कि वोट आफ थैंक्स को रद करने का कारण विपक्षी दल की ओर से पूछे जाने वाले सवालों का कांग्रेस के पास कोई जवाब न होना है। कांग्रेस सरकार की ओर से चुनाव के दौरान बठिंडा में नशा तस्कर से सवा लाख बोतलें शराब पकड़े जाने और उस पर दर्ज केस को खारिज करवाने के मामले में आप स्पष्टीकरण चाहती है।

चुनाव आयोग की हिदायतों पर पुलिस ने बठिंडा में तस्कर को सवा लाख बोतलें शराब के साथ पकड़कर केस दर्ज किया था और अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद अदालत में अर्जी दायर की गई कि सरकार अब इस केस को खत्म करना चाहती है। इससे साफ है कि कांग्रेस नशे के मामलों में कितनी गंभीर है। कांग्रेस सरकार को डर है कि असंवैधानिक ढंग से तैनात 13 सलाहकारों, जिनमें से 5 के पास मंत्री का दर्जा है, के बारे में पूछेगा, इसलिए चर्चा से भागना ही उचित समझा। उन्होंने कहा कि रेत व्यापार में गुंडा टैक्स अकाली नेताओं से कांग्रेसी नेताओं के हाथ चले जाने संबंधित सवाल का जवाब देना भी कांग्रेस के लिए गले की हड्डी साबित होना था।
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