कर्मियों के साथ की गई वायदा खिलाफी का खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा : सुमेर सिवाच
विधानसभा चुनाव में कर्मचारियों का रोष सड़कों पर दिखाई देगा : नरेंद्र दिनोद
चंडीगढ़। लंबित मांगों को लेकर नाराज रोडवेज कर्मियों ने वीरवार को प्रदेश के सभी डिपो और सब डिपो में काले बिल्ले लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। एसकेएस के आह्वान पर यह विरोध प्रदर्शन 23 अगस्त को भी होगा।
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के राज्य प्रधान नरेंद्र दिनोद और महासचिव सुमेर सिवाच ने संयुक्त बयान में बताया कि सरकार रोडवेज कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर लागू करने की बजाय लंबे समय से टरकाऊ रवैया अपना रही है। जनता व कर्मियों की मांग के विपरित सरकार 362 रूटों पर 3658 प्राइवेट बसों को परमिट देकर विभाग का निजीकरण कर बर्बाद करने पर अड़ी हुई है। बार-बार मानी हुई मांगों को लागू ना करने जैसे रोडवेज कर्मचारियों की काटी हुई छुट्टियों का पत्र वापस कर पहले वाली छुट्टियां लागू ना करना, ओवर टाइम पॉलिसी को संशोधित कर कर्मियों के हक में लागू करना, चालक-परिचालक व लिपिक के वेतनमान को बढ़ाने की मांगों की अनदेखी करने का जो कार्य किया है, इससे प्रदेश के कर्मचारियों में भारी गुस्सा है।
वरिष्ठ उपप्रधान शिव कुमार श्योराण, कोषाध्यक्ष सुशील ईक्कस, मुख्य संगठन सचिव रमेश श्योकंद, उप महासचिव नवीन राणा व उपाध्यक्ष जय कुंवर दहिया ने कहा कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का नहीं करने, पुरानी पेंशन स्कीम बहाल नहीं करने, खाली पदों पर पक्की भर्ती नहीं करने, जोखिम भरी ड्यूटी करने पर भी जोखिम भत्ता न देने का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने बताया 22 व 23 अगस्त को काली पट्टी बांध कर नाराजगी जाहिर करने के अलावा प्रदेश के कर्मचारियों का सड़क पर आंदोलन जारी रहेगा। सरकार को विधानसभा चुनावों में कर्मचारियों की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा।